हरियाणा सरकार पर हाईकोर्ट का डंडा: आदेश न मानने पर लगा जुर्माना, शिक्षा व्यवस्था पर मांगी रिपोर्ट
Apr 22, 2026 12:17 PM
हरियाणा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सरकार ने पूर्व में दिए गए न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किया, जिसे कोर्ट की अवहेलना मानते हुए सरकार पर 10,000 रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। न्यायमूर्ति शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह जुर्माना केवल सांकेतिक नहीं है, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है। जुर्माने की यह राशि पीजीआई चंडीगढ़ के 'पुअर पेशेंट रिलीफ फंड' में जमा कराई जाएगी।
स्कूलों का रिपोर्ट कार्ड पेश करे सरकार: बुनियादी सुविधाओं पर मांगा जवाब
अदालत ने केवल जुर्माने तक ही सीमित न रहकर हरियाणा के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत का ब्यौरा भी मांगा है। स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि वे एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें, जिसमें प्रदेश के स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात की स्पष्ट जानकारी हो। कोर्ट यह जानना चाहता है कि क्या प्रदेश के स्कूल 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009' (RTE Act) के मानकों को पूरा कर रहे हैं या नहीं। विशेष रूप से स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति, पीने के पानी, लाइब्रेरी और खेल के मैदानों जैसी मूलभूत सुविधाओं पर कोर्ट ने रिपोर्ट तलब की है।
विशेष शिक्षकों की कमी पर चिंता, भर्ती प्रक्रिया का मांगा हिसाब
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि हरियाणा के स्कूलों में 'विशेष आवश्यकता वाले बच्चों' (CWSN) के लिए नियुक्त विशेष शिक्षकों (Special Educators) की भारी कमी है। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि 9 अगस्त 2024 को शुरू की गई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अब किस चरण में है और विशेष शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने हस्तक्षेपकर्ताओं को अपनी बात रखने की अनुमति तो दी, लेकिन उन्हें औपचारिक तौर पर पक्षकार बनाने से इनकार कर दिया।
शिक्षा के स्तर पर गिरती साख का मामला
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह कड़ा रुख प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी ढांचे का अभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। अब जबकि मामला सीधे तौर पर कोर्ट की निगरानी में है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि विभाग फाइलों से बाहर निकलकर स्कूलों की दशा सुधारने पर ध्यान देगा। मामले की अगली सुनवाई में सरकार को इन तमाम बिंदुओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।