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पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट सख्त: सरकारी विभागों में 'गलत पोस्टिंग' पर रोक, नियमों के विरुद्ध ट्रांसफर आर्डर रद्द

Mar 26, 2026 4:21 PM

हरियाणा। सरकारी महकमों में रसूख और रैंडम तरीके से होने वाले तबादलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है। अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सिद्धांत प्रतिपादित किया है कि विभाग किसी भी कर्मचारी को उसकी विशेषज्ञता और डिग्री के विपरीत पद पर नहीं बैठा सकता। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की खंडपीठ ने महेंद्र सिंह नामक याचिकाकर्ता के मामले में 10 अगस्त 2022 को जारी किए गए उस ट्रांसफर ऑर्डर को खारिज कर दिया है, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर तैनाती की गई थी।

कैडर और योग्यता का 'कॉकटेल' नहीं चलेगा

पूरा मामला तकनीकी पेच से जुड़ा है। याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) के पद पर कार्यरत थे, लेकिन विभाग ने उन्हें नगर निगम पानीपत में 'बिल्डिंग इंस्पेक्टर' के पद पर भेज दिया। अदालत के सामने दलील दी गई कि बिल्डिंग इंस्पेक्टर का काम मुख्य रूप से सिविल इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता से जुड़ा होता है।

हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड का गहन अवलोकन करने के बाद पाया कि हरियाणा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन सर्विस रूल्स, 1998 के अनुसार जूनियर इंजीनियर (सिविल), मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल—ये तीनों पूरी तरह अलग कैडर हैं। इनकी शैक्षणिक योग्यताएं और कार्यक्षेत्र भी भिन्न हैं, जिन्हें एक-दूसरे में मिलाया नहीं जा सकता।

जनहित और कार्य की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में एक दूरगामी टिप्पणी करते हुए कहा कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री रखने वाले व्यक्ति से सिविल इंजीनियरिंग या निर्माण संबंधी कार्यों की उम्मीद करना तर्कसंगत नहीं है। पीठ ने माना कि इस प्रकार की 'मिस-फिट' पोस्टिंग से न केवल विभाग के कामकाज की गुणवत्ता गिरती है, बल्कि इससे सार्वजनिक सुरक्षा और सरकारी परियोजनाओं के हितों को भी गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि प्रशासनिक सुविधा के नाम पर नियमों और योग्यता की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

भविष्य के तबादलों पर पड़ेगा असर

इस फैसले के बाद अब हरियाणा के विभिन्न विभागों में उन कर्मचारियों के बीच उम्मीद की किरण जगी है, जिन्हें उनकी पसंद या योग्यता के विरुद्ध दूसरे कैडर के पदों पर 'एडजस्ट' किया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है जो नियमों की व्याख्या अपनी सुविधानुसार करते हैं। अब विभागों को तबादला सूची तैयार करते समय कर्मचारी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और उसके कैडर का विशेष ध्यान रखना होगा, वरना अदालती हस्तक्षेप के चलते पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

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