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संत रामपाल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: देशद्रोह मामले में जमानत मंजूर, 11 साल बाद आएंगे जेल से बाहर?

Apr 08, 2026 2:39 PM

हरियाणा। सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। कोर्ट ने देशद्रोह के उस बहुचर्चित मामले में रामपाल को जमानत दे दी है, जिसकी वजह से वे पिछले एक दशक से भी अधिक समय से हिसार की सेंट्रल जेल में बंद थे। करीब 11 साल, 4 महीने और 20 दिन की सलाखों के पीछे की जिंदगी के बाद रामपाल को मिली इस राहत ने उनके समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ा दी है। हालांकि, उम्रकैद की सजा और अन्य कानूनी पेचीदगियों के बीच यह जमानत उनकी रिहाई के लिए कितनी निर्णायक होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

बरवाला कांड की वो खौफनाक यादें और गिरफ्तारी

संत रामपाल का नाम साल 2014 में तब पूरी दुनिया की सुर्खियों में आया था, जब हिसार के बरवाला स्थित उनके सतलोक आश्रम को पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया था। हाईकोर्ट द्वारा अवमानना मामले में पेश होने के आदेशों की अनदेखी के बाद पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची थी। 19 नवंबर 2014 का वह दिन आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब आश्रम के अंदर मौजूद हजारों समर्थकों और पुलिस बल के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस भीषण टकराव में 5 महिलाओं और एक मासूम बच्ची की जान चली गई थी। इसी हिंसा और सरकारी तंत्र को चुनौती देने के आरोप में रामपाल पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

बाढ़ के संकट में 'मसीहा' की छवि और जनसमर्थन

जेल में रहने के बावजूद संत रामपाल का प्रभाव क्षेत्र के लोगों के बीच कम नहीं हुआ। पिछले साल जब भारी बारिश के कारण हरियाणा के तमाम गांव बाढ़ की चपेट में थे और खेतों में जलभराव से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही थीं, तब जेल में बंद रामपाल के अनुयायियों ने उनकी प्रेरणा से राहत कार्यों की कमान संभाली थी। सरकार से मदद की आस लगाए बैठे किसानों के लिए उस वक्त रामपाल का आश्रम 'मसीहा' बनकर उभरा। हजारों गांवों में जल निकासी के लिए आश्रम की ओर से पाइपें और मोटरें भिजवाई गई थीं। संकट के समय मिली इस मदद ने आम जनता के बीच उनकी छवि को नए सिरे से परिभाषित किया, जिसके बाद कई जगहों पर उनके सम्मान में बड़े आयोजन भी हुए।

आगे क्या? कानूनी चुनौतियों का सिलसिला जारी

जमानत मिलना भले ही एक बड़ी कामयाबी हो, लेकिन रामपाल की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। उन पर लगे अन्य आरोपों और उम्रकैद की सजा के विरुद्ध अपीलों पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके वकील अन्य कानूनी बाधाओं को किस तरह पार करते हैं। फिलहाल, हिसार जेल प्रशासन को आदेश की कॉपी मिलने का इंतजार है, जिसके बाद ही जेल से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

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