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सिर कटने पर भी महीने भर जीने का हुनर! युवाओं के डिजिटल आंदोलन के बीच चर्चा में आए कॉकरोच के हैरान करने वाले सच

May 22, 2026 2:13 PM

देश के कानूनी गलियारों से निकला एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सियासी मंचों पर एक बड़े आंदोलन की शक्ल अख्तियार कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने वकालत के पेशे में संघर्ष कर रहे और बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर 'कॉकरोच' से कर दी थी। चीफ जस्टिस का कहना था कि रोजगार न मिलने के कारण ऐसे युवा मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई (RTI) एक्टिविस्ट बनकर हर किसी पर निशाना साधने लगते हैं। यह टिप्पणी जैसे ही सार्वजनिक हुई, युवाओं का एक बड़ा वर्ग इसे अपने स्वाभिमान पर चोट मानकर भड़क उठा। इसी के जवाब में 30 साल के अभिजीत दीपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम से एक अनोखी ऑनलाइन मुहिम शुरू कर दी, जिसके एक्स (X) हैंडल पर महज कुछ ही दिनों में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं।

क्या वाकई गाली है कॉकरोच? विज्ञान तो कुछ और ही कहता है

इस पूरे राजनीतिक घमासान और बयानों की नूराकुश्ती से इतर, एक बुनियादी और बेहद दिलचस्प सवाल खड़ा होता है। क्या किसी को नीचा दिखाने के लिए 'कॉकरोच' कहना वाकई सही है? जिस जीव को हम अपने घरों के कोनों में देखकर नाक-भौं सिकोड़ते हैं, जीव विज्ञान की नजर में वह इस पूरी धरती का सबसे शानदार और ताकतवर 'सर्वाइवर' (Survivor) है। डायनासोर के युग से लेकर आज के आधुनिक काल तक, करोड़ों वर्षों के क्रमिक विकास के बाद भी कॉकरोच ने खुद को बचाए रखा है। ऐसे में यह सोचना जरूरी हो जाता है कि जिसे समाज एक गाली या अपमान के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है, उसके पास प्रकृति का ऐसा कौन सा हुनर है जो इंसानों के पास भी नहीं है।

बिना सिर के भी महीने भर जिंदगी की जंग, रेडिएशन को मात देने का हुनर

कॉकरोच के जैविक गुणों का अध्ययन करें तो इंसान दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाता है। परमाणु हमले से निकलने वाले विनाशकारी रेडिएशन को यह जीव इंसानों के मुकाबले 10 गुना ज्यादा बर्दाश्त कर सकता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अगर कॉकरोच का सिर धड़ से अलग भी हो जाए, तब भी वह अपनी खुली संचार प्रणाली (Open Circulatory System) के कारण लगभग एक महीने तक जीवित रह सकता है। वह केवल इसलिए मरता है क्योंकि सिर न होने के कारण वह पानी नहीं पी पाता। इसके अलावा, संकट के समय यह जीव पानी के भीतर 40 मिनट तक अपनी सांस रोककर खुद को सुरक्षित बाहर निकाल लेता है। ये सारे गुण सिखाते हैं कि परिस्थितियां कितनी भी बदतर क्यों न हों, आखिरी सांस तक हार नहीं माननी चाहिए।

हर माहौल में ढलने की कला और खतरे को भांपने की सुपरफास्ट स्पीड

लचीलापन (Adaptability) इस जीव की सबसे बड़ी ताकत है। कॉकरोच के पैरों में बारीक सेंसरी हेयर्स यानी संवेदी बाल होते हैं, जो हवा के मामूली दबाव को भी महसूस कर लेते हैं। यही वजह है कि खतरा सामने आने से पहले ही महज 0.05 सेकंड के भीतर यह अपनी दिशा बदल लेता है। खाने-पीने के मामले में भी यह बेहद अनूठा है; अगर इसे सामान्य भोजन न मिले तो यह गोंद, साबुन, चमड़ा और किताबों के कवर तक को खाकर पेट भर सकता है, और यदि कुछ भी न मिले तो बिना कुछ खाए एक महीने तक जिंदा रह सकता है। अब यह देश के युवाओं और समाज पर निर्भर करता है कि वे कड़े संघर्ष के बीच खड़े इस जीव के गुणों को एक सकारात्मक प्रेरणा के रूप में देखते हैं या फिर पारंपरिक तौर पर इसे महज एक घृणित संज्ञा मानकर छोड़ देते हैं।

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