Punjab News: मोगा में मुलाजिमों पर लाठीचार्ज और वादे पूरे न होने से नाराजगी जताते हुए जसविंदर सिद्धू ने आप से इस्तीफा दिया
Mar 09, 2026 5:29 PM
जालंधर: पंजाब की राजनीति में सोमवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब मोगा जिले के बाघापुराना विधानसभा हलके से जुड़े आम आदमी पार्टी के नेता जसविंदर सिंह सिद्धू ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। वह गाडा पंजाब के डायरेक्टर और बाघापुराना के कोऑर्डिनेटर के रूप में काम कर रहे थे। सिद्धू ने यह कदम चंडीगढ़ में बजट सत्र के दौरान मुलाजिमों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा न करने के विरोध में उठाया है। उनके इस फैसले के बाद मोगा और बाघापुराना के राजनीतिक माहौल में चर्चा तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर दी इस्तीफे की जानकारी
जसविंदर सिंह सिद्धू ने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक की। उन्होंने एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि वह आम आदमी पार्टी से जुड़े सभी पदों को छोड़ रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि जिन मुलाजिमों ने अपने हकों के लिए आवाज उठाई, उन पर पुलिस द्वारा किया गया लाठीचार्ज बेहद निंदनीय है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में कर्मचारियों की जायज मांगों को दबाने के लिए बल प्रयोग करना गलत संदेश देता है।
लाठीचार्ज की घटना पर जताई नाराजगी
सिद्धू ने अपने बयान में कहा कि चंडीगढ़ में बजट सत्र के दौरान कर्मचारियों पर हुआ पुलिस लाठीचार्ज बेहद दुखद है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से संघर्ष कर रहे मुलाजिमों के साथ सरकार ने सख्ती बरती। उनके मुताबिक यह कार्रवाई उन उम्मीदों के खिलाफ है जो लोगों ने सरकार से लगाई थीं। इसी कारण उन्होंने पार्टी पदों पर बने रहना उचित नहीं समझा।
चुनावी वादों को लेकर उठाए सवाल
जसविंदर सिद्धू ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले किए गए वादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय आम आदमी पार्टी ने पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने समेत कई बड़े वादे किए थे। इन वादों का व्यापक प्रचार किया गया और कर्मचारियों तथा आम लोगों को भरोसा दिलाया गया था। लेकिन सरकार बनने के बाद अब तक इन वादों को पूरा नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में निराशा बढ़ी है।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सिद्धू ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार बयान देकर लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनके अनुसार कर्मचारियों की जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह सरकार की खोखली बयानबाजी के लिए वाहवाही नहीं कर सकते और इसलिए पार्टी की किसी भी गतिविधि में आगे हिस्सा नहीं लेंगे।
कर्मचारियों के संघर्ष को जारी समर्थन
हालांकि इस्तीफा देने के बावजूद जसविंदर सिंह सिद्धू ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलन का वह समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मुलाजिमों के हितों की लड़ाई किसी पार्टी से ऊपर है और इस मुद्दे पर उनका रुख पहले की तरह कायम रहेगा। सिद्धू के इस्तीफे के बाद मोगा जिले के बाघापुराना विधानसभा हलके में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं और इस घटनाक्रम पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।