August 2, 2026

Jhajjar Blood Bank Scam: झज्जर सिविल अस्पताल में खून की सरकारी फीस का गबन, अकाउंटेंट अखिल पर ₹19 लाख डकारने का आरोप

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Jhajjar Blood Bank Scam: झज्जर सिविल अस्पताल में खून की सरकारी फीस का गबन, अकाउंटेंट अखिल पर ₹19 लाख डकारने का आरोप

10 हजार जमा किए और 10 लाख गायब! झज्जर अस्पताल के बैंक स्टेटमेंट ने खोली घोटाले की पोल

Jhajjar Blood Bank Scam: हरियाणा के स्वास्थ्य महकमे से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी दावों और वित्तीय पारदर्शिता की पोल खोलकर रख दी है। झज्जर के सिविल अस्पताल स्थित सरकारी ब्लड बैंक में मरीजों की रगों में दौड़ने वाले रक्त की सरकारी एवज का सौदा कर लिया गया।

शुरुआती जांच रिपोर्ट इशारा कर रही है कि ब्लड बैंक में तैनात अकाउंटेंट (लेखाकार) अखिल ने निजी अस्पतालों को सप्लाई किए गए ब्लड बैग्स से मिलने वाली लाखों रुपये की सरकारी प्रोसेसिंग फीस को सरकारी ट्रेजरी में भेजने के बजाय खुद ही ठिकाने लगा दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है।

तीन साल का रिकॉर्ड खंगाला तो उड़े होश, कागजों में गायब मिली रकम

यह पूरा खेल कोई एक-दो दिन का नहीं, बल्कि पिछले तीन सालों से लगातार चल रहा था। दरअसल, सरकारी ब्लड बैंक से जब भी किसी निजी अस्पताल के मरीज को रक्त दिया जाता है, तो सरकार द्वारा तय की गई एक निश्चित फीस वसूली जाती है।

नियमों के मुताबिक इस रकम को रोजाना या साप्ताहिक आधार पर सरकारी बैंक खाते में जमा करना होता है। लेकिन जब जांच टीम ने साल 2023 से लेकर मार्च 2026 तक के बही-खातों का मिलान किया, तो आंकड़ों का जो अंतर सामने आया, उसने ऑडिटर्स के भी होश उड़ा दिए।

कुर्सी से हटाए जाने के बाद भी नहीं छूटा पैसे का मोह, जबरन काटता रहा रसीदें

इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही और आरोपी की ढिठाई की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब मई 2025 में ही तत्कालीन उप सिविल सर्जन (एड्स) को कुछ गड़बड़ी की बू आ गई थी।

उन्होंने 6 मई 2025 को ही लिखित आदेश जारी कर अखिल से पैसे के लेन-देन का चार्ज छीनकर डेटा मैनेजर राजीव को सौंप दिया था। लेकिन आरोपी अखिल ने न सिर्फ चार्ज सौंपने में आनाकानी की, बल्कि अपनी ऊंची पहुंच का फायदा उठाकर मार्च 2026 तक यानी करीब 10 महीने तक अवैध रूप से काउंटर पर बैठ खुद ही कैश कलेक्ट करता रहा और रसीदें काटता रहा।

मार्च की क्लोजिंग में खुली पोल, अब 2019 से लेकर अब तक के पापों का होगा हिसाब

पर्दे के पीछे चल रहा यह पूरा सिंडिकेट तब बेनकाब हुआ जब मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग के दौरान बैंक स्टेटमेंट और रसीद बुकों (Receipt Books) का कड़ाई से मिलान किया गया। जब जांच कमेटी ने आरोपी अखिल से कैशबुक और वाउचर मांगे, तो वह बगले झांकने लगा और कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर पाया।

आपको बता दें कि अखिल ने 16 सितंबर 2019 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत इस पद पर ज्वाइन किया था। अधिकारियों को अंदेशा है कि यह घोटाला सिर्फ 19 लाख का नहीं है, अगर पिछले 7 साल की विशेष ऑडिट (Special Audit) की गई तो गबन की यह राशि करोड़ों तक पहुंच सकती है।

“मामला बेहद गंभीर है और सरकारी धन के दुरुपयोग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच कमेटी हर एक रसीद और बैंक ट्रांसफर की बारीकी से जांच कर रही है। आरोपी कर्मचारी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत अपना पक्ष रखने का एक आखिरी मौका और दिया गया है। जैसे ही अंतिम रिपोर्ट टेबल पर आएगी, दोषी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस में धोखाधड़ी और गबन की एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।”
— डॉ. मंजू कादियान, सिविल सर्जन, झज्जर

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