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Kaithal BREAKING: कैथल के ऐतिहासिक बाबा राजपुरी डेरे में साधु की हत्या, जंजीरों से बांधकर पीटा

GGaganpreet Kaur
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Kaithal BREAKING: कैथल के ऐतिहासिक बाबा राजपुरी डेरे में साधु की हत्या, जंजीरों से बांधकर पीटा

कैथल के ऐतिहासिक बाबा राजपुरी डेरे में साधु की हत्या

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Kaithal BREAKING: हरियाणा के कैथल जिले के गांव बाबा लदाना स्थित सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक ‘बाबा राजपुरी डेरे’ के भीतर बुधवार को अध्यात्म को शर्मसार करने वाली वारदात सामने आई। डेरे के विश्राम गृह में यूपी से आए साधु शिव शंकर पुरी (35) की दर्दनाक तरीके से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। सुबह जब ग्रामीण पूजा-पाठ के लिए डेरे में पहुंचे, तो साधु का शव क्षत-विक्षत हालत में पड़ा मिला, जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई।

वारदात की खबर आग की तरह फैली और बड़ी संख्या में डेरे के अनुयायी और ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए। गुस्से में आए लोगों ने डेरा परिसर में जमकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि डेरे के मुख्य महंत ने ही अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस वीभत्स वारदात को अंजाम दिया है। मामले की संवेदनशीलता और धार्मिक पहलू को देखते हुए सीआईए (CIA), एंटी व्हीकल थेफ्ट स्टाफ और सदर थाना पुलिस की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं।

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जंजीर-रस्सियों से बांधकर दी यातनाएं, उखाड़े सिर और दाढ़ी के बाल

मौके पर मौजूद लोगों और प्राथमिक जांच के मुताबिक, साधु शिव शंकर पुरी की हत्या से पहले उन्हें भारी यातनाएं दी गईं। आरोपियों ने उन्हें पहले रस्सियों और लोहे की जंजीरों से जकड़ दिया, जिसके बाद लाठी-डंडों से बेदर्दी से पीटा गया। दरिंदगी का आलम यह था कि मारपीट के दौरान मृतक साधु के सिर और दाढ़ी के बाल तक उखाड़ दिए गए।

मृतक साधु शिव शंकर पूरी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे और करीब तीन महीने पहले ही इस डेरे में आए थे। वह यहां डेरे के मुख्य महंत दूजपुरी के पास ही रह रहे थे।

सिगरेट उठाने को लेकर हुआ था मामूली विवाद: SHO

वारदात की वजह को लेकर सदर थाना एसएचओ कुलदीप सिंह ने बताया कि शुरुआती तफ्तीश में बेहद हैरान करने वाली बात सामने आई है। जांच के अनुसार, साधु शिव शंकर पूरी का मुख्य महंत दूजपुरी के साथ एक सिगरेट उठाने को लेकर कहासुनी हुई थी।

शिव शंकर पूरी द्वारा महंत की सिगरेट उठाए जाने पर दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि उसने हिंसक रूप ले लिया। एसएचओ ने बताया कि मुख्य महंत दूजपुरी समेत कुछ अन्य साधुओं को हिरासत में ले लिया गया है और उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।

स्वामी विवेकानंद की गुरु-परंपरा से जुड़ा है इस डेरे का स्वर्णिम इतिहास

जिस डेरे में यह खूनी खेल खेला गया, उसका इतिहास भारतीय अध्यात्म में बेहद गौरवमयी और पावन माना जाता है। इस डेरे की स्थापना 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुई थी। 1690 में जन्मे संत बाबा राजपुरी ने 8 साल की उम्र में संन्यास लिया था और माता हिंगलाज के उपासक रहे। इस डेरे में 360 धूणे स्थापित हैं।

सबसे खास बात यह है कि विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस थे, और रामकृष्ण परमहंस के गुरु ‘महंत तोता पूरी’ इसी बाबा राजपुरी डेरे के सातवें मुख्य महंत थे। महंत तोता पूरी ने 1884 में यहां समाधि ली थी।

80 एकड़ जमीन और 400 साल पुराना ऐतिहासिक पेड़

वर्तमान में इस डेरे के पास करीब 80 एकड़ कृषि भूमि और 135 से अधिक गाय-पशु हैं। खास बात यह है कि डेरे में कभी कोई पशु खरीदा नहीं जाता; श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर स्वयं पशु दान कर जाते हैं। डेरा परिसर में 400 साल पुराना जाल (पीलू) का वृक्ष आज भी मौजूद है।

हर साल दशहरे के अगले दिन और चांदनी एकादशी पर यहां विशाल मेला लगता है। रोजाना 31 ज्योत जलाकर 4 बार आरती की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन इस दुखद घटना ने सदियों पुराने इस पावन अध्यात्मिक केंद्र की साख पर गहरा दाग लगा दिया है।

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