September 2, 2026

Haryana Ration Rules: हरियाणा में राशन नीति में बदलाव, तेल की जगह खाते में आएगी रकम

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Haryana Ration Rules: हरियाणा में राशन नीति में बदलाव, तेल की जगह खाते में आएगी रकम

हरियाणा में राशन नीति में बदलाव, तेल की जगह खाते में आएगी रकम

Haryana Ration Rules: हरियाणा की जन वितरण प्रणाली (PDS) में आए दिन हो रहे तकनीकी बदलाव और नए नियमों ने आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा रखी है। राशन डिपो पर मिलने वाले गेहूं, चीनी और तेल के लिए अलग-अलग बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की अनिवार्यता ने सबसे ज्यादा बुजुर्गों और दिहाड़ी मजदूरों को पस्त कर रखा है। डिपो पर अंगूठे की स्कैनिंग न होने के कारण बुजुर्गों को कई-कई बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं की इसी बढ़ती नाराजगी को देखते हुए खाद्य एवं पूर्ति विभाग ने अब सितंबर और अक्टूबर महीने का राशन एक साथ वितरित करने की योजना तैयार की है, ताकि लोगों को हर महीने लंबी लाइनों में न खड़ा होना पड़े।

सरसों तेल की जगह खाते में पहुंचेगी सीधी नकदी

राज्य में समय पर सरसों की सरकारी खरीद और डिपो तक सप्लाई न हो पाने के कारण सरसों तेल के वितरण में बड़ा संकट खड़ा हो गया था। सप्लाई चेन में आई इस रुकावट से निपटने के लिए सरकार ने फिलहाल डिपो से तेल देने के बजाय सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पैसा भेजने (DBT) का फैसला लिया है। इससे पहले सरकार 2 लीटर सरसों तेल के ऐवज में राशन कार्ड धारकों को 100 रुपये की सब्सिडी देती थी। अब सप्लाई ठप होने की वजह से यह रकम सीधे पात्र परिवारों के खातों में जमा कराई जाएगी, ताकि वे खुले बाजार से तेल खरीद सकें।

हर वस्तु के लिए अलग फिंगरप्रिंट स्कैनिंग बनी मुसीबत

उपभोक्ताओं और डिपो होल्डरों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि पोर्टल पर हर राशन सामग्री (गेहूं, चीनी, तेल) के लिए अलग से फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन मांगता है। उम्र बढ़ने के कारण बुजुर्गों के हाथ के निशान मशीनों में मैच नहीं होते। ऐसे में एक ही डिपो पर राशन लेने के लिए बुजुर्गों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार तो खाली हाथ लौटना पड़ता है। हालांकि, दो महीने का राशन एक साथ देने की व्यवस्था से डिपो पर भीड़ जरूर कम होगी, लेकिन मशीन पर बायोमेट्रिक बार-बार मांगने की तकनीकी खामी अब भी जस की तस बनी हुई है।

डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता का दावा, पर धरातल पर सुधार की सख्त जरूरत

सरकार का तर्क है कि डिजिटल सत्यापन और दो महीने का एडवांस कोटा देने से राशन वितरण में होने वाली धांधली पर लगाम लगेगी और राशन की कालाबाजारी रुकेगी। साथ ही इससे उपभोक्ताओं के समय की बचत होगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब तक बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए ‘आइरिस स्कैन’ (आंखों की पुतली से सत्यापन) या ‘ओटीपी’ (OTP) जैसी सरल वैकल्पिक व्यवस्था को सख्ती से लागू नहीं किया जाता, तब तक सिर्फ राशन की तिथियां बदलने से आम गरीब की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं होगी।

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