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Haryana News: कैथल में असिस्टेंट रजिस्ट्रार-इंस्पेक्टर रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, ACB ने ट्रैप बिछाकर पकड़ा

Feb 26, 2026 3:14 PM

कैथल: हरियाणा के कैथल में एंटी करप्शन ब्यूरो ने पैक्स एआर (असिस्टेंट रजिस्ट्रार) और इंस्पेक्टर को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। एसीबी की टीम ने यह कार्रवाई शिकायत के आधार पर ट्रैप बिछाकर की। आरोप है कि दोनों ने पाड़ला पैक्स में नौकरी दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति से एक लाख रुपए की मांग की थी। इससे पहले वे 70 हजार रुपए ले चुके थे और शेष 30 हजार लेते समय पकड़ लिए गए।

कैथल कोऑपरेटिव सोसाइटी में कार्रवाई

एसीबी इंस्पेक्टर सुबे सिंह ने बताया कि आरोपी ऋषि महाजन कोऑपरेटिव सोसाइटी कैथल में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनात है, जबकि जसबीर इंस्पेक्टर है। शिकायत मिलने के बाद टीम ने योजना बनाकर कार्रवाई की। जैसे ही 30 हजार रुपए आरोपी को दिए गए, टीम ने मौके पर ही उसे काबू कर लिया।

पाड़ला गांव के मांगेराम ने की शिकायत

गांव पाड़ला निवासी मांगेराम ने एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत दी थी। उसने बताया कि वह अपने पोते अभिमन्यु को पैक्स में नौकरी दिलवाना चाहता था, जहां करीब दो साल पहले भर्ती निकली थी। आरोप है कि एआर और इंस्पेक्टर ने नौकरी लगवाने के लिए उससे एक लाख रुपए मांगे थे।

पहले भी युवाओं को नौकरी दिलाने का आरोप

मांगेराम ने आरोप लगाया कि उसके पोते से पहले भी एआर ऋषि महाजन और इंस्पेक्टर जसबीर ने रिश्वत लेकर 8 से 10 युवाओं को नौकरी दिलाई थी। उसने दावा किया कि इन युवाओं में कई केवल 8वीं से 10वीं तक पढ़े थे। आरोप के अनुसार किसी से दो लाख तो किसी से तीन लाख रुपए तक लिए गए थे।

70 हजार पहले ले चुके, बढ़ाई डिमांड

शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने पहले 70 हजार रुपए इंस्पेक्टर जसबीर को दे दिए थे। इसके बाद भी आरोपी लगातार पैसे की मांग बढ़ा रहे थे। जब उसे लगा कि उसके पोते की नौकरी नहीं लग रही और पैसे फंस सकते हैं, तब उसने एसीबी से संपर्क किया।

30 हजार लेते ही रंगेहाथ गिरफ्तार

एसीबी टीम ने शिकायत के बाद मांगेराम को 30 हजार रुपए देकर भेजा। वह कोऑपरेटिव सोसाइटी कैथल पहुंचा और एआर ऋषि महाजन को राशि सौंपी। जैसे ही पैसे दिए गए, टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद इंस्पेक्टर जसबीर को भी हिरासत में ले लिया गया।

एसीबी इंस्पेक्टर सुबे सिंह ने कहा कि दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। यह भी जांच की जा रही है कि उनका किन अधिकारियों से संपर्क था और वे किस आधार पर नौकरी दिलाने का आश्वासन दे रहे थे। साथ ही पहले जिन युवाओं को नौकरी दिलाने के आरोप हैं, उनकी भी जांच की जा रही है।

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