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चीका में पुलिस की बड़ी रेड: अवैध नशा मुक्ति केंद्र से 16 युवक रेस्क्यू, पुराने स्कूल में चल रहा था खेल

Apr 16, 2026 10:55 AM

कैथल। नशा मुक्ति के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर दुकान चलाने वालों के खिलाफ प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिला स्वास्थ्य विभाग की गुप्त सूचना पर चीका पुलिस ने प्रोफेसर कॉलोनी के एक पुराने स्कूल भवन में चल रहे नशा मुक्ति केंद्र पर अचानक छापा मारा। कार्रवाई के दौरान पता चला कि जिस केंद्र को मरीजों का भविष्य सुधारने की जिम्मेदारी दी गई थी, वह खुद 'अवैध' पटरी पर दौड़ रहा था। पुलिस ने मौके से बदहवास हालत में मिले 16 युवकों को रेस्क्यू कर इलाज के लिए कैथल नागरिक अस्पताल भेजा है।

लाइसेंस खत्म, फिर भी जारी था दाखिला

इस पूरी छापेमारी की कमान जिला ड्रग कंट्रोल ऑफिसर (DCO) चेतन व0र्मा संभाल रहे थे। जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, वह केंद्र की वैधता से जुड़ा था। अधिकारियों के मुताबिक, इस नशा मुक्ति केंद्र का लाइसेंस जून 2025 में ही खत्म हो चुका था। नियमानुसार लाइसेंस खत्म होने के बाद केंद्र को बंद करना या रिन्यूअल प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां संचालक ने नियमों को ठेंगा दिखाते हुए न केवल केंद्र चालू रखा, बल्कि नए मरीजों की भर्ती भी जारी रखी।

बंद कमरों में कैद थे 16 लोग, कोई दवा बरामद नहीं

चीका थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने बताया कि छापेमारी के दौरान केंद्र के अंदर 16 लोग मौजूद थे। प्रशासन ने तुरंत दो एंबुलेंस मंगवाई और सभी को सुरक्षित तरीके से जिला अस्पताल शिफ्ट किया ताकि उनके स्वास्थ्य की जांच हो सके। हालांकि, मौके से तलाशी के दौरान कोई प्रतिबंधित या नशीली दवा बरामद नहीं हुई है, लेकिन बिना वैध दस्तावेजों के केंद्र का संचालन ही अपने आप में गंभीर अपराध है।

सुनसान इमारतों में फल-फूल रहा है 'अवैध' धंधा

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अक्सर इस तरह के केंद्र आबादी से दूर या पुरानी इमारतों में इसलिए बनाए जाते हैं ताकि वहां होने वाली गतिविधियों की भनक बाहर न लग सके। लोगों ने आरोप लगाया कि कई संचालक शुरुआत में कागजी औपचारिकताएं पूरी कर लाइसेंस तो ले लेते हैं, लेकिन बाद में रिन्यूअल की मोटी फीस और कड़े मानकों से बचने के लिए इसे अवैध रूप से चलाते रहते हैं। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीमें इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या मरीजों के साथ वहां किसी तरह की ज्यादती तो नहीं हो रही थी।

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