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जासूसी केस में नया मोड़: कैथल के देविंद्र सिंह को हाईकोर्ट ने दी बेल, सबूतों पर उठे सवाल

Apr 09, 2026 11:11 AM

कैथल।  कैथल जिले के गांव मस्तगढ़ के रहने वाले 25 वर्षीय छात्र देविंद्र सिंह ढिल्लो के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत भरी खबर आई है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) को देश की संवेदनशील सूचनाएं भेजने के गंभीर आरोपों में घिरे देविंद्र को अदालत ने नियमित जमानत दे दी है। जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब तक ऐसे कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है, जिससे पहली नजर में जासूसी के आरोप साबित होते हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर अनिश्चितकाल के लिए सलाखों के पीछे रखना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

करतारपुर यात्रा और हनीट्रैप की उलझी कहानी

इस पूरे मामले की पटकथा नवंबर 2024 में शुरू हुई थी, जब देविंद्र सिंह करतारपुर कॉरिडोर के जरिए पाकिस्तान के धार्मिक स्थलों की यात्रा पर गया था। जांच एजेंसियों का दावा था कि वहां देविंद्र की मुलाकात एक पाकिस्तानी युवती से हुई, जिसने उसे अपने प्रेम जाल (हनीट्रैप) में फंसा लिया।

आरोप लगाए गए थे कि इस युवती के जरिए ही देविंद्र का संपर्क आईएसआई के पांच एजेंटों से कराया गया, जिन्होंने उसे सैन्य ठिकानों की तस्वीरें और जानकारी साझा करने के बदले पैसों का लालच दिया। पुलिस के अनुसार, पटियाला के खालसा कॉलेज में एमए का छात्र रहा देविंद्र पटियाला कैंट से जुड़ी सूचनाएं सीमा पार भेज रहा था, जिसे बाद में उसने अपने फोन से डिलीट कर दिया।

सोशल मीडिया पर हथियारों की नुमाइश ने फंसाया था पेच

 देविंद्र सिंह एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता खेती-बाड़ी कर घर चलाते हैं। पटियाला में किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई करने वाले देविंद्र का अब तक का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस बात का विशेष उल्लेख किया कि आरोपी के खिलाफ केवल दो एफआईआर दर्ज हैं और कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित नहीं है। करीब 11 महीने की जेल काटने के बाद अब देविंद्र बाहर आएगा, लेकिन उस पर लगे देशद्रोह जैसे गंभीर दाग हटेंगे या नहीं, यह आगे की कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल पर निर्भर करेगा।

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