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कैथल फायरिंग कांड: 1 करोड़ की फिरौती मांगने वाले 2 और आरोपी गिरफ्तार, स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट का बड़ा एक्शन

Apr 17, 2026 3:59 PM

कैथल। कैथल में संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। चीका के चानना रोड स्थित 'गिल मोबाइल' शॉप पर हुई सनसनीखेज फायरिंग मामले में स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट ने दो और आरोपियों को दबोच लिया है। डीएसपी सुशील प्रकाश ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस वारदात का मास्टरमाइंड और उसके साथी एक करोड़ रुपये की फिरौती वसूलने के फिराक में थे। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए गांव भागल निवासी रवि कुमार और भराणी खालसा के भरत कुमार को गिरफ्तार किया है।

4 अप्रैल की वो शाम: दहशत का वो मंजर

वारदात 4 अप्रैल की शाम करीब 6 बजे की है, जब पूरा बाजार ग्राहकों से गुलजार था। तभी एक मोटरसाइकिल पर सवार दो नकाबपोश युवक 'गिल मोबाइल' शॉप के सामने रुके और अचानक गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। गनीमत रही कि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन गोलियों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा। हमलावर मौके पर ही खौफ छोड़कर फरार हो गए थे, जिसके बाद थाना चीका में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट को सौंपी गई थी।

एनकाउंटर के बाद खुला राज, आरोपियों ने पुलिस पर भी चलाई थी गोली

इस मामले में पुलिस को पहली बड़ी सफलता 14 अप्रैल की रात मिली थी। गुप्त सूचना के आधार पर जब पुलिस ने ढांड क्षेत्र में घेराबंदी की, तो कुरुक्षेत्र निवासी आरोपी रजत ने बाइक से भागते हुए पुलिस टीम पर चार राउंड फायर झोंक दिए। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी नियंत्रित जवाबी फायरिंग की, जिसमें रजत के पैर में गोली लगी और वह पकड़ा गया। रजत और भरत पर हरियाणा पुलिस ने 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। जांच में सामने आया कि भरत वारदात के वक्त बाइक चला रहा था और उसने भी फायरिंग की थी। वहीं, रवि ने वारदात के बाद आरोपियों को पनाह दी और हथियारों की सप्लाई की थी।

1 करोड़ की डिमांड और तस्करों का कनेक्शन

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कबूला है कि फायरिंग का मकसद दुकानदार को डराना था ताकि उससे 1 करोड़ रुपये की फिरौती वसूली जा सके। पुलिस ने इनके कब्जे से एक अवैध देसी पिस्तौल (32 बोर), जिंदा कारतूस और खाली खोल बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल हैरान करने वाली है—19 वर्षीय भरत 12वीं पास है, जबकि रवि ने 10वीं तक की पढ़ाई की है। पुलिस अब इन्हें अदालत में पेश कर रिमांड हासिल करेगी, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके हथियारों के मुख्य स्रोत का पता लगाया जा सके।

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