KUK News: कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में छात्राओं का हल्ला बोल, चीफ वार्डन और वीसी दफ्तर का घेराव, धांधली का आरोप

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में छात्राओं का हल्ला बोल, चीफ वार्डन और वीसी दफ्तर का घेराव
KUK News: कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयूके) में हॉस्टल आवंटन और मेरिट सूची में कथित धांधली को लेकर सोमवार को कैंपस में भारी हंगामा देखने को मिला। संयुक्त छात्र मोर्चा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्राओं ने गर्ल्स चीफ वार्डन कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। आक्रोशित छात्राओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वाइस चांसलर (वीसी) कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
मेरिट और आरक्षण नियमों को दरकिनार करने का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं और छात्राओं का सीधा आरोप है कि हॉस्टल की पहली और दूसरी मेरिट सूची तैयार करने में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। अकादमिक अंकों, मेरिट और नियमानुसार मिलने वाले आरक्षण—विशेषकर एससी/एसटी (SC/ST) और दिव्यांग कोटे—की पूरी तरह अनदेखी की गई है।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता का घोर अभाव है, जिसके कारण मेधावी और जरूरतमंद छात्राएं सड़कों पर या महंगे प्राइवेट पीजी में रहने को मजबूर हैं।
’20 किलोमीटर वाले को कमरा, 200 किमी दूर की छात्राएं परेशान’
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने प्रशासनिक पक्षपात का पर्दाफाश करते हुए कहा कि भिवानी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और सिरसा जैसे दूर-दराज के इलाकों से पढ़ने आई छात्राओं को हॉस्टल नहीं दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, महज 20 से 25 किलोमीटर की दूरी से आने वाले स्थानीय छात्रों को हॉस्टल के कमरे आवंटित कर दिए गए हैं।
छात्राओं का कहना था कि इतनी दूर से आकर पढ़ाई जारी रखना और हर दिन किराए के कमरे तलाशना उनके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद कष्टदायक साबित हो रहा है।
चीफ वार्डन की जवाबदेही तय करने और पारदर्शी सूची की मांग
संयुक्त छात्र मोर्चा ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखते हुए कहा कि:
हॉस्टल आवंटन की वर्तमान मेरिट सूची को रद्द कर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा समीक्षा की जाए।
सभी आरक्षित वर्गों (SC/ST व दिव्यांग) को नियमानुसार हॉस्टल सीट का लाभ दिया जाए।
चीफ वार्डन की प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाए और पूरी आवंटन प्रक्रिया को समय पर विश्वविद्यालय पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाए।
मांगें न मानने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कैंपस में न्याय, समानता और निष्पक्षता की बहाली के लिए है। छात्र मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द ही इन विसंगतियों को दूर कर पात्र छात्राओं को राहत नहीं दी, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
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