Kurukshetra News: “रावण का पुतला फूंकने से पहले राम जैसा चरित्र बनाओ”, कुरुक्षेत्र में दो गुटों की जंग पर भड़के सार्थ तिवारी

"रावण का पुतला फूंकने से पहले राम जैसा चरित्र बनाओ", कुरुक्षेत्र में दो गुटों की जंग पर भड़के सार्थ तिवारी
Kurukshetra News: ज्योतिसर, पवन शर्मा। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में विजयादशमी से पहले ही रावण दहन के आयोजन को लेकर माहौल गरमाने लगा है। दो अलग-अलग गुटों द्वारा दशहरा पर्व पर अपनी-अपनी साख चमकाने और अलग कार्यक्रम आयोजित करने की चर्चाओं ने सामाजिक व राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया है। इस खींचतान पर थानेसर के युवा नेता और ब्राह्मण सभा के पूर्व प्रधान स्व. पंडित ओमकार नाथ तिवारी के पौत्र सार्थ तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि दशहरा हमारी सनातन परंपरा का प्रतीक है और इसे किसी भी कीमत पर राजनीतिक वर्चस्व या शक्ति प्रदर्शन का जरिया नहीं बनने दिया जाएगा।
“पुतला जलाने से पहले श्रीराम जैसा चरित्र गढ़ना होगा”
सार्थ तिवारी ने आयोजन को लेकर चल रही रस्साकशी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब हर साल मैदान में रावण का पुतला जलता है, तो ऐसा लगता है मानो वह सामने खड़ी लाखों की भीड़ से चीख-चीखकर पूछ रहा हो कि ‘क्या तुममें से कोई राम है?’ उन्होंने कहा कि रावण दहन महज कागजी पुतले में आग लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। अगर सही अर्थों में अधर्म पर धर्म की विजय मनानी है, तो समाज को भगवान श्रीराम के आदर्शों, उनके आचरण और मर्यादा को अपने निजी जीवन में उतारना होगा।
दो गुटों की जंग से समाज में गलत संदेश, सार्थ तिवारी ने दिया कुरुक्षेत्र के विकास पर जुटने का न्योता
दशहरा आयोजन को दो धड़ों में बंटता देख सार्थ तिवारी ने कहा कि परंपराओं को इस तरह बांटना कुरुक्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का अपमान है। इस प्रकार की खींचतान से पूरे समाज और खासकर ब्राह्मण समाज में भारी नाराजगी है। उन्होंने दोनों गुटों से निजी मतभेद और राजनीतिक अहम छोड़कर एक मंच पर आने की गुहार लगाई। सार्थ ने कहा कि रावण दहन के नाम पर शक्ति प्रदर्शन करने के बजाय अगर दोनों पक्ष कुरुक्षेत्र के विकास और जनसेवा के लिए हाथ मिलाते हैं, तो वह खुद भी बिना किसी शर्त के उनके साथ खड़े होने को तैयार हैं।
समाज को एकजुट करने का पर्व है दशहरा, न कि बांटने का
युवा नेता ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का इस्तेमाल अपने निजी या राजनीतिक स्वार्थ के लिए करना पूरी तरह गलत है। विजयादशमी का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत की सीख देता है और इसका मूल मकसद समाज को आपस में जोड़ना है, न कि गुटबाजी में धकेलना। उन्होंने कुरुक्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की कि वे धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखें और इसे शांतिपूर्ण व पारंपरिक तरीके से ही संपन्न होने दें।
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