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Mahendragarh : शिक्षा की गुणवत्ता और समग्र विकास के लिए एनईपी-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी- प्रो. टंकेश्वर कुमार

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Mahendragarh : शिक्षा की गुणवत्ता और समग्र विकास के लिए एनईपी-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी- प्रो. टंकेश्वर कुमार

Mahendragarh : शिक्षा की गुणवत्ता और समग्र विकास के लिए एनईपी-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी- प्रो. टंकेश्वर कुमार

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Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा आयोजित 40वें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का मंगलवार को ऑनलाइन माध्यम से शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न संस्थानों से शिक्षकगण एवं शोधार्थी उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

 

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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने अपने संदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) की परिवर्तनकारी दृष्टि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 का उद्देश्य शिक्षा को समग्र, बहुविषयक और मूल्यपरक बनाते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है।

 

उन्होंने नवाचार, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण तथा अनुसंधान को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण घटक बताते हुए शिक्षकों से एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को 21वीं सदी की उभरती आवश्यकताओं एवं चुनौतियों के अनुरूप तैयार करें।

 

 

कुलपति ने हकेवि के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा शिक्षकों के लिए निरंतर शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास से जुड़े सार्थक कार्यक्रम आयोजित करने के प्रयासों की सराहना की।

 

उन्होंने एमएमटीटीसी टीम के समर्पण, परिश्रम एवं प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की पेशेवर दक्षता को सुदृढ़ करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने केंद्र को शिक्षक विकास एवं शिक्षा की गुणवत्ता को और मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करने हेतु प्रोत्साहित किया।

 

 

कार्यक्रम का शुभारंभ यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक एवं शिक्षक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने विशिष्ट अतिथियों, विषय विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए एनईपी-2020 की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 समग्र, बहुविषयक, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने एनईपी-2020 की संकल्पना को प्रभावी रूप से धरातल पर उतारने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया और प्रतिभागियों से कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

 

 

कार्यक्रम के दौरान प्रो. पायल चंदेल कंवर ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं संरचना प्रस्तुत की। उन्होंने प्रतिभागियों को कार्यक्रम के उद्देश्यों, समय-सारिणी एवं विभिन्न घटकों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम के सुचारू एवं प्रभावी संचालन के लिए निर्धारित नियमों, दिशा-निर्देशों, उपस्थिति संबंधी आवश्यकताओं तथा अन्य महत्वपूर्ण निर्देशों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

 

 

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रो. प्रमोद कुमार, निदेशक, यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, हकेवि; प्रो. तनु गुप्ता, उपनिदेशक, यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, हकेवि; प्रो. पायल चंदेल कंवर, कार्यक्रम समन्वयक एवं अधिष्ठाता, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज, हकेवि तथा डॉ. विष्णु नारायण कुचेरिया, कार्यक्रम समन्वयक एवं मनोविज्ञान विभाग, हकेवि की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को विशेष महत्व प्रदान किया तथा प्रतिभागियों को एनईपी-2020 की दृष्टि एवं उद्देश्यों के साथ सार्थक रूप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन मिला। कार्यक्रम के अंत में प्रो. पायल चंदेल कंवर, कार्यक्रम समन्वयक एवं अधिष्ठाता, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज, हकेवि ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

 

इस कार्यक्रम के लिए देश के 07 राज्यों तथा 18 विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं संस्थानों से कुल 82 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की दृष्टि, उद्देश्यों एवं प्रावधानों से परिचित कराने के साथ-साथ इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक समझ एवं दृष्टिकोण विकसित करना है।

 

 

 

यह भी देखें – हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में धूमधाम से मनाया गया इंजीनियर्स डे-2026, ‘सतत तकनीकी संप्रभु भारत’ के निर्माण पर रहा जोर

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