Narnaul News: नारनौल के शहीद भूपेंद्र सिंह को राजकीय सम्मान से विदाई, कुपवाड़ा में दिया था सर्वोच्च बलिदान

नारनौल के शहीद भूपेंद्र सिंह को राजकीय सम्मान से विदाई, कुपवाड़ा में दिया था सर्वोच्च बलिदान
Narnaul News: महेंद्रगढ़ जिले के मोहनपुर गांव की माटी ने शनिवार को अपने एक और शूरवीर बेटे को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में अग्रिम सीमा पर ‘हिम शौर्य ऑपरेशन’ के दौरान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 2 राष्ट्रीय राइफल्स के नायब सूबेदार भूपेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, माहौल गमगीन हो गया। भारत माता के सपूत के अंतिम दर्शन के लिए गांव मोहनपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और पूर्व सैनिक पहुंचे।
सैन्य टुकड़ी ने बिगुल की धुन और ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ अपने साथी जांबाज को अंतिम सलामी दी। इसके बाद अमर शहीद भूपेंद्र सिंह का पूरे राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
23 साल देश की सेवा और सैन्य परंपरा की विरासत
नायब सूबेदार भूपेंद्र सिंह के चचेरे भाई ने बताया कि भूपेंद्र करीब 23 वर्ष पूर्व भारतीय सेना में शामिल हुए थे। देशभक्ति और वर्दी का जज्बा उनके खून में ही रचा-बसा था। उनका पूरा परिवार ही देश सेवा की मिसाल रहा है। शहीद भूपेंद्र के पिता रोहतास सिंह सेना से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनके दो अन्य चाचा हवा सिंह और दलीप सिंह भी भारतीय सेना में सूबेदार के पद से ही रिटायर्ड हुए हैं।
सैन्य पृष्ठभूमि वाले इस परिवार के सबसे छोटे बेटे भूपेंद्र ने भी अपने बुजुर्गों के पदचिह्नों पर चलते हुए देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी। दो-तीन दिन पहले जब शहादत की खबर गांव पहुंची थी, तभी से पूरे इलाके में शोक की लहर थी।
सिर से उठा पिता का साया, नम हुईं हजारों आंखें
शहीद भूपेंद्र सिंह अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बेटियों का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी 19 वर्ष की है और बीटेक की पढ़ाई कर रही है, जबकि छोटी बेटी महज 7 साल की है और दूसरी कक्षा की छात्रा है। जिस उम्र में बेटियों को पिता के मार्गदर्शन और दुलार की जरूरत थी, उसी समय सिर से पिता का साया उठ जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
अंतिम संस्कार के वक्त जब सेना के जवानों ने तिरंगा परिवार को सौंपा और भारत माता के जयकारे लगे, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंख से आंसू छलक पड़े।
अदम्य साहस और बलिदान पर पूरे हरियाणा को गर्व
मोहनपुर गांव के निवासियों और पूर्व सैनिकों ने कहा कि भूपेंद्र सिंह ने अपनी शहादत से सिर्फ अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे महेंद्रगढ़ जिले और हरियाणा राज्य का नाम गर्व से ऊंचा किया है। उनका अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।
अंतिम यात्रा में उमड़े अपार जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि देश अपने वीरों के त्याग को कभी नहीं भूलता। पूरा इलाका भले ही शोक के सन्नाटे में डूबा हो, लेकिन अपने लाडले की शहादत पर हर ग्रामीण का सीना गर्व से चौड़ा है।
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