चेन्नई: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम धमाके देश के इतिहास का एक काला और दर्दनाक अध्याय था जिसने अनगिनत परिवारों को गहरे जख्म दिये हैं। उन्होंने कोयंबटूर में 14 फरवरी, 1998 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह हमारे राष्ट्र के इतिहास में एक काला और दर्दनाक अध्याय था।उपराष्ट्रपति ने कहा कि उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन लालकृष्ण आडवाणी कोयंबटूर के दौरे पर थे तभी भयानक सिलसिलेवार धमाकों ने शहर को हिलाकर रख दिया था और अनगिनत परिवारों को गहरे जख्म दिए थे। उस समय व्याप्त डर, दुख और अनिश्चितता का माहौल मेरी स्मृति में आज भी ताजा है। कोयंबटूर के निवासी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा उन धमाकों में से एक में मैं बाल-बाल बचा था।
मेरे जीवन के सबसे दर्दनाक पल के रूप में आज भी ताजा- उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे खौफनाक पल, जब हमने घायलों को बचाने के लिए संघर्ष किया और गंभीर रूप से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। वह घटना, मेरे जीवन के सबसे दर्दनाक पल के रूप में आज भी ताजा है। उन्होंने उन शोक संतप्त परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। अंग्रेजी और तमिल भाषा में साझा किए गए अपने संदेश में उपराष्ट्रपति ने कहा कि आइए हम आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहने और शांति, सद्भाव तथा राष्ट्रीय अखंडता को बनाए रखने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएं।
मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना और जीवित बचे लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करता हूं- उपराष्ट्रपति
पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा कि इस्लामी आतंकवादियों ने 11 स्थानों को निशाना बनाया था, उनका उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) के वरिष्ठ नेता आडवाणी जी की जनसभा में व्यवधान डालना और निर्दोष नागरिकों का कत्ल करना था। इस घटना को हर साल काले दिन के रूप में मनाया जाता है। आज बम विस्फोट की 28वीं बरसी पर, मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना और जीवित बचे लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करता हूं।
28 साल बाद भी लोगों के मन से नहीं मिटी पीड़ा- उपराष्ट्रपति
भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कहा कि 28 साल बाद भी उस भयावह घटना की पीड़ा लोगों के मन से नहीं मिटी हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा कि आइए हम संकल्प लें कि भारत में धार्मिक घृणा के कारण ऐसी अत्याचारपूर्ण घटनाएं फिर कभी न हों। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कहा कि 1998 में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) शासन के दौरान आज ही के दिन आतंकवादियों द्वारा किए गए विस्फोटों में 58 लोगों की जान गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। वह जख्म आज भी हरे हैं। उन्होंने द्रमुक पर आरोप लगाया कि उसने कोयंबटूर बम विस्फोट के दोषियों को सजा पूरी होने से पहले रिहा करके हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों के साथ ‘विश्वासघात’ किया है।