Deepender Hooda: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की दोहरी नीति क्यों? पहलवानों-किसानों को रोका, दूसरों को परमिशन; हुड्डा का तंज
Jun 07, 2026 5:47 PM
करनाल। असंध में पार्टी कार्यकर्ताओं के भारी हुजूम के बीच मंच संभालते ही दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सबसे पहले लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का मुद्दा उठाया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "यह अच्छी बात है कि लोकतंत्र में हर किसी को आवाज उठाने का हक मिले और उन्हें इजाजत भी दी गई। लेकिन हैरानी तब होती है जब देश का पेट भरने वाले किसान, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराने वाले पहलवान और मुख्यधारा की विपक्षी पार्टी कांग्रेस जब दिल्ली या कुरुक्षेत्र में अपनी आवाज बुलंद करना चाहती है, तो सरकार की लाठियां और बैरिकेड्स उनका रास्ता रोक लेते हैं।" हुड्डा ने कहा कि अनुमति देने का यह दोहरा पैमाना साफ दिखाता है कि सरकार चुनिंदा तरीके से लोगों को टारगेट कर रही है।
'आजादी के बाद से जो साख बची थी, वह 2014 के बाद तार-तार हुई'
देशभर के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों के भविष्य से जुड़े नीट (NEET) परीक्षा विवाद पर सांसद हुड्डा ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया। उन्होंने इतिहास की कड़ियों को जोड़ते हुए कहा, "आजादी के बाद से देश में बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं कराई जाती रही हैं। पहले पीएमटी होती थी, तब बच्चों और परिवारों का इन संस्थाओं पर अटूट भरोसा था। लेकिन 2014 के बाद ऐसा क्या बदल गया कि देश में साख पूरी तरह जमींदोज हो गई? अब तक करीब 90 परीक्षाओं के पेपर लीक होना कोई सामान्य बात नहीं है, यह एक संगठित भ्रष्टाचार है।"
छात्रों की आत्महत्या पर छलका दर्द, शिक्षा मंत्री पर साधा निशाना
भाषण के दौरान दीपेंद्र हुड्डा का दर्द उस वक्त साफ नुमाया हुआ जब उन्होंने पेपर लीक के बाद पैदा हुए मानसिक तनाव के चलते दम तोड़ने वाले छात्रों का जिक्र किया। उन्होंने बेहद भावुक लहजे में कहा, "दोबारा परीक्षा देने और अनिश्चितता का दबाव हमारे देश के मासूम बच्चे नहीं झेल पा रहे हैं। इस अवसाद के कारण 6 बच्चों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। अगर इन मौतों के बाद भी हम देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय न करें और उनका इस्तीफा न मांगें, तो फिर किससे मांगें?"
कृषि विभाग बना 'सजा का मैदान'
नौकरशाही के स्तर पर हाल ही में हुए एक प्रशासनिक फेरबदल को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस सांसद ने सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीबीएसई के तत्कालीन चेयरमैन को हटाकर जिस तरह से कृषि विभाग में सचिव पद पर भेजा गया है, वह सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया, "अब तक जो बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही देश के युवाओं ने झेली है, वही अब किसानों को झेलनी पड़ेगी क्योंकि मोदी सरकार में कृषि मंत्रालय को अधिकारियों के लिए एक सजा की पोस्टिंग (सजा भुगतने का ठिकाना) बना दिया गया है।"
अपने संबोधन के आखिर में हुड्डा ने कार्यकर्ताओं में जोश फूंकते हुए कहा कि वे ऐसी दमनकारी नीतियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि संसद से लेकर सड़क तक वे हरियाणा के हर उस युवा की आवाज बनते रहेंगे जिसे मौजूदा व्यवस्था में दरकिनार किया जा रहा है।