हरियाणा कांग्रेस में बड़ी बगावत: कार्यकारी अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने दिया इस्तीफा, विधायक पत्नी भी छोड़ेंगी साथ
Mar 17, 2026 3:34 PM
हरियाणा। हरियाणा राज्यसभा चुनाव की एक सीट पर जीत का गुलाल अभी थमा भी नहीं था कि कांग्रेस के भीतर मचे घमासान ने खुशियों को सन्नाटे में बदल दिया है। पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध को दरकिनार कर पांच विधायकों ने निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर दी। इस बगावत ने न केवल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संगठन के भीतर की गुटबाजी को भी सरेआम कर दिया है। अब बागी तेवर दिखाने वाले इन पांचों विधायकों पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है।
रामकिशन गुर्जर का किनारा: नारायणगढ़ में बदली सियासी पटकथा
अंबाला जिले की राजनीति में बड़ा रसूख रखने वाले हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि उनकी पत्नी शैली चौधरी नारायणगढ़ से मौजूदा विधायक हैं। मंगलवार को राज्यसभा वोटिंग के दौरान शैली चौधरी की मुख्यमंत्री नायब सैनी के राजनीतिक सलाहकार तरुण भंडारी के साथ नजदीकी ने साफ कर दिया था कि वे कांग्रेस का साथ छोड़ चुकी हैं। सूत्रों की मानें तो शैली चौधरी जल्द ही विधायकी से भी इस्तीफा दे सकती हैं। गुर्जर परिवार को सांसद कुमारी शैलजा का कट्टर समर्थक माना जाता रहा है, ऐसे में उनका जाना शैलजा गुट के लिए तगड़ा व्यक्तिगत नुकसान है।
क्या हरियाणा में होने जा रहे हैं उपचुनाव?
सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि नारायणगढ़ समेत उन सभी सीटों पर उपचुनाव की पटकथा लिखी जा चुकी है जहाँ से क्रॉस वोटिंग हुई है। अगर शैली चौधरी इस्तीफा देती हैं, तो चुनाव आयोग को छह महीने के भीतर नारायणगढ़ में दोबारा मतदान कराना होगा। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मीडिया से रूबरू होते हुए स्पष्ट किया कि गद्दारी करने वाले विधायकों के नाम दिल्ली भेज दिए गए हैं। हुड्डा ने कड़े लहजे में कहा कि जो पार्टी लाइन से भटके हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। हालांकि, जानकारों का मानना है कि ये विधायक अब सत्ताधारी खेमे के संपर्क में हैं और जल्द ही भगवा चोला ओढ़ सकते हैं।
शैलजा और हुड्डा गुट की रार फिर आई सामने
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर हरियाणा कांग्रेस की पुरानी बीमारी 'गुटबाजी' को सतह पर ला दिया है। एक तरफ हुड्डा खेमा बागियों को बाहर का रास्ता दिखाने की पैरवी कर रहा है, तो दूसरी तरफ शैलजा समर्थकों का टूटना संगठन की कमजोरी उजागर कर रहा है। रामकिशन गुर्जर का जाना अंबाला और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी के जनाधार को चोट पहुँचा सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस इन पांचों बागियों को सिर्फ नोटिस देकर शांत हो जाएगी या वाकई इनकी सदस्यता रद्द कर प्रदेश को उपचुनाव के मैदान में धकेलेगी।