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महिला आरक्षण बिल पर संसद में जोरदार बहस: मोदी बोले- महिलाओं के विरोधियों का बुरा हाल हुआ, उन्हें माफी नहीं मिली

Apr 16, 2026 3:44 PM

नई दिल्ली:  लोकसभा के भीतर महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन संशोधन बिलों पर चर्चा के दौरान सियासी माहौल गरमा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि देश में जब-जब चुनाव हुए हैं, महिलाओं को अधिकार देने का विरोध करने वालों को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए। वहीं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इन बिलों के प्रावधानों और प्रक्रिया को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।

मोदी का विपक्ष पर सीधा हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को अधिकार देने के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया, उनका राजनीतिक भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे इस बिल का समर्थन करें और इसे किसी राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से न देखें।

पंचायत आरक्षण का उदाहरण

मोदी ने अपने भाषण में पंचायत स्तर पर महिलाओं को मिले आरक्षण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले स्थानीय निकायों में आरक्षण देना आसान समझा गया क्योंकि इससे किसी बड़े पद पर असर नहीं पड़ता था। लेकिन अब समय आ गया है कि महिलाओं को संसद और नीति निर्धारण की प्रक्रिया में भी समान भागीदारी दी जाए।

अखिलेश यादव का पलटवार

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा महिला आरक्षण को नारे के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर है, तो अपने संगठन और सरकार में अधिक महिलाओं को शीर्ष पदों पर क्यों नहीं ला रही है। उन्होंने पिछड़े वर्ग और मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा भी उठाया।

कांग्रेस ने उठाए परिसीमन पर सवाल

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार इस बिल के जरिए परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहती है, जिससे महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो सकती है। उन्होंने यह भी पूछा कि लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का आधार क्या है और इसे कैसे तय किया गया।

जनगणना और आरक्षण पर बहस

बहस के दौरान जनगणना और जातीय आंकड़ों का मुद्दा भी सामने आया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जातीय जनगणना से बचना चाहती है, जबकि सरकार की ओर से कहा गया कि जनगणना की प्रक्रिया जारी है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

लोकतंत्र और भागीदारी पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण में शामिल करना विकसित भारत की दिशा में जरूरी कदम है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतीक होगा। उन्होंने सभी सांसदों से इस ऐतिहासिक अवसर का समर्थन करने की अपील की, ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत हो सके।

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