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एलपीजी संकट पर खरगे ने सरकार को घेरा; नड्डा ने कांग्रेस पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया

Mar 16, 2026 5:27 PM

नई दिल्ली: राज्यसभा में सोमवार को देश में एलपीजी संकट के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने संकट के लिए सरकार की अग्रिम योजना की कमी को जिम्मेदार ठहराया, जबकि केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जे पी नड्डा ने कांग्रेस पर देश में अराजकता फैलाने और राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए खरगे ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ा है और इसका प्रभाव देशभर में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस संकट का सबसे अधिक असर गरीब और कमजोर वर्गों, मध्यम वर्ग, सामान्य परिवारों, रेस्तरां, छात्रावासों तथा व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

खरगे ने कहा कि भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है और इसमें से करीब 90 प्रतिशत आयात होर्मुज की खाड़ी के रास्ते होता है। ‘‘ऐसे में मौजूदा स्थिति घरेलू उपलब्धता और कीमतों की स्थिरता दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।’’ नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एलपीजी संकट का असर देश के लगभग हर हिस्से में महसूस किया जा रहा है और घरेलू उपभोक्ता काफी परेशान हैं। छोटे ढाबों, रेस्तरां, छात्रावासों और सामुदायिक रसोई तक इस संकट से प्रभावित हैं। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर एलपीजी सिलेंडर 5,000 रुपये से अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने लोकसभा में एलपीजी की कमी से इनकार करते हुए लोगों से अफवाहों से दूर रहने की अपील की थी, लेकिन जमीनी स्थिति इससे अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार को पता था कि पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्ग प्रभावित हो सकते हैं, तो उसे पहले से वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यदि एलपीजी आयात के लिए पहले से वैकल्पिक उपाय किए गए होते तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

खरगे ने यह भी कहा कि अब एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के लिए प्रतीक्षा अवधि बढ़ गई है। उनके अनुसार, शहरों में यह अवधि करीब 25 दिन और ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में लगभग 45 दिन तक पहुंच गई है, जिससे घबराहट में बुकिंग और जमाखोरी की आशंका बढ़ रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार को संकट की आशंका थी तो उसने समय रहते सख्त कदम क्यों नहीं उठाए और विपक्ष को विश्वास में क्यों नहीं लिया? उन्होंने इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग भी की।

इस दौरान सदन के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने खरगे से उनका वक्तव्य समाप्त करने को कहा। शून्यकाल में वक्ताओं को सामान्यतः तीन मिनट का समय दिया जाता है लेकिन खरगे को अतिरिक्त समय दिया गया। बाद में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी इस मुद्दे पर लोकसभा में विस्तृत जवाब दे चुके हैं, लेकिन कांग्रेस सदस्यों ने उनकी बात नहीं सुनी। रिजिजू ने यह भी कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी इस मुद्दे पर बोलने का अवसर दिया गया था, लेकिन उन्होंने अन्य विषयों पर चर्चा की।

नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा संघर्ष के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, संकट के समय भी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का एक नेता एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी करते हुए भी पकड़ा गया है। उन्होंने कहा, “वे लोगों को उकसा रहे हैं और देश के शांतिप्रिय नागरिकों को भड़का रहे हैं। संकट के समय देश के साथ खड़े होने के बजाय वे अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जो निंदनीय है।”

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