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राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के विपरीत व दबाव में काम कर रहे थे : सीएम भगवंत मान

Apr 03, 2026 3:44 PM

चंडीगढ़: भगवंत मान ने शुक्रवार को राघव चड्ढा की आलोचना करते हुए कहा कि राज्यसभा सदस्य दबाव में काम कर रहे थे और उन्होंने आम आदमी पार्टी के रुख के विपरीत व्यवहार किया। यह बयान उस समय आया जब चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद विवाद गहराया हुआ है। मुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप रहना और पार्टी के निर्देशों का पालन न करना संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ है।

संसद में भूमिका को लेकर सवाल

भगवंत मान ने कहा कि यदि कोई नेता पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाने जैसे मुद्दों पर बोलने से बचता है या संसद में महत्वपूर्ण मामलों पर बहिर्गमन नहीं करता है, तो यह पार्टी की नीति से अलग जाना माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की गिरफ्तारी जैसे मामलों पर आवाज न उठाना भी गंभीर विषय है। मान के मुताबिक, ऐसे रवैये से पार्टी की सामूहिक रणनीति कमजोर होती है।

चड्ढा का जवाब और बयान

विवाद के बीच राघव चड्ढा ने एक दिन पहले कहा था कि उन्हें ‘‘चुप कराया गया है, लेकिन वह पराजित नहीं हुए हैं।’’ उनका यह बयान उनके पद से हटाए जाने के बाद सामने आया। इस टिप्पणी के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं और राजनीतिक हलकों में इस पर चर्चा तेज हो गई है।

पार्टी का पलटवार और आरोप

आप ने चड्ढा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वह संसद में केंद्र सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने से कतराते रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सवाल उठाया कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति, जो नरेन्द्र मोदी से डरता है, देश के लिए प्रभावी तरीके से लड़ सकता है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि चड्ढा अपने प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान दे रहे थे।

पार्टी फैसलों का बचाव

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि संसद में नेताओं को बदलना कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए बताया कि पार्टी में पहले भी ऐसे बदलाव होते रहे हैं। मान ने कहा कि जब दल के सदस्य संसद में बैठते हैं, तो कई फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं, जैसे बहिर्गमन का निर्णय।

व्हिप उल्लंघन पर सख्ती का संकेत

मान ने स्पष्ट किया कि यदि कोई सदस्य पार्टी की नीति से हटकर काम करता है या निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो यह पार्टी व्हिप का उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई तय है। इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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