हरियाणा मंडी ब्रेकिंग फसल खरीद के नए नियमों पर मचा घमासान, नारनौंद और सोनीपत में सड़कों पर उतरे किसान
Apr 03, 2026 4:39 PM
हिसार/सोनीपत। नारनौंद की बास अनाज मंडी में शुक्रवार सुबह से ही किसानों का जुटना शुरू हो गया था। बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ किसान नेता सुरेश कोथ ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार हर सीजन में नए प्रयोग करके किसानों को परेशान करना बंद करे। उन्होंने कहा, "नारनौंद की धरती ने हमेशा बड़े आंदोलनों की नींव रखी है। अगर इन अव्यावहारिक नियमों को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो हरियाणा की मंडियों में तालेबंदी होगी और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
सोनीपत: 10 मिनट का एक पास, 3 महीने का इंतजार?
सोनीपत में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे युवा किसान नेता अभिमन्यु कोहड़ ने सरकार की नई नीति के तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत पहले पंचिंग होगी, फिर किसान की फोटो खींची जाएगी और अन्य डिजिटल औपचारिकताएं पूरी होंगी। इस पूरी प्रक्रिया में एक ट्राली के पास के लिए कम से कम 10 मिनट खर्च हो रहे हैं।
कोहड़ ने गणित समझाते हुए कहा, "अगर एक खिड़की पर 10 मिनट में एक पास बनता है, तो पूरे दिन में बमुश्किल 150-170 पास बन पाएंगे। जबकि सीजन के पीक समय में हजारों ट्रालियां मंडी के बाहर खड़ी होती हैं। इस रफ्तार से तो किसान की फसल बिकने में 3 महीने लग जाएंगे, जबकि गेहूं का सीजन मात्र 15-20 दिन का होता है।"
'घोटाला सीमाओं पर रोको, मंडियों में नहीं'
किसानों का तर्क है कि सरकार दूसरे राज्यों की फसल को हरियाणा में खपाने वाले घोटालेबाजों को पकड़ने के बजाय असली किसानों का गला घोंट रही है। किसानों ने सुझाव दिया कि यदि सरकार को फर्जीवाड़ा रोकना है, तो वह राज्य की सीमाओं (बॉर्डर) पर सख्ती बढ़ाए, न कि मंडियों के गेट पर किसानों को घंटों लाइन में खड़ा करे।
बिजली विभाग और महापंचायत की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान केवल मंडी के नियम ही मुद्दा नहीं रहे। किसानों ने बिजली निगम के एक अधिकारी के खिलाफ भी मोर्चा खोला। आरोप है कि अधिकारी का व्यवहार किसानों के प्रति तानाशाही पूर्ण है और विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि खरीद नीति और बिजली विभाग के मसले हल नहीं हुए, तो जल्द ही 'सर्व समाज की महापंचायत' बुलाई जाएगी, जिसमें कोई बड़ा और कड़ा निर्णय लिया जा सकता है।