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नीट परीक्षा रद्द होने से पहले छात्रों तक पहुंचे थे 300 सवाल: 120 सवाल हूबहू सेम, व्हाट्सऐप से फैला क्वेश्चन बैंक, जांच एजेंसियां अलर्ट

May 12, 2026 2:05 PM

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद राजस्थान का सीकर और झुंझुनूं राष्ट्रीय स्तर की जांच के केंद्र में आ गए हैं। आरोप है कि परीक्षा से दो दिन पहले कई छात्रों तक एक कथित ‘गेस पेपर’ या ‘क्वेश्चन बैंक’ पहुंचा था, जिसके 120 से 140 सवाल वास्तविक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते पाए गए। इसी मामले को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित परीक्षा रद्द कर दी है। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने 8 मई से जांच शुरू की थी और अब तक 15 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह कथित पेपर नेटवर्क किस स्तर तक फैला हुआ था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

सीकर में छात्रों तक पहुंचा कथित क्वेश्चन बैंक

जांच में सामने आया है कि सीकर और झुंझुनूं के कई छात्रों के पास परीक्षा से पहले एक कथित गेस पेपर पहुंचा था। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से अधिक सवाल शामिल थे। दावा किया जा रहा है कि इनमें से 120 से 140 सवाल हूबहू NEET UG 2026 परीक्षा में पूछे गए। सूत्रों के मुताबिक इस क्वेश्चन बैंक में कुल 720 में से करीब 600 नंबर के सवाल शामिल थे। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। SOG इस बात की जांच कर रही है कि यह केवल गेस पेपर था या वास्तविक पेपर लीक का हिस्सा।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह कथित गेस पेपर केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहे चूरू जिले के एक छात्र से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि उसने यह सामग्री सीकर में अपने एक दोस्त को भेजी थी। इसके बाद यह कई अन्य छात्रों तक पहुंच गई। जांच में यह भी सामने आया है कि बाद में यह क्वेश्चन बैंक एक पीजी संचालक तक पहुंचा। उसने इसे अपने यहां रहने वाले छात्रों और कुछ करियर काउंसलर्स को भी फॉरवर्ड किया। एजेंसियां अब मोबाइल चैट, सोशल मीडिया और कॉल रिकॉर्ड की जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं।

पीजी संचालक ने दी थी शिकायत

परीक्षा होने के बाद सीकर के एक पीजी संचालक ने उद्योग नगर थाना और NTA को शिकायत दी थी। उसने दावा किया था कि बड़ी संख्या में छात्रों के पास पहले से क्वेश्चन बैंक पहुंच चुका था। बाद में जांच में सामने आया कि उसके पास भी यह सामग्री वॉट्सऐप के जरिए आई थी। SOG का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद ही मामले की गंभीरता बढ़ी और शुरुआती जांच शुरू की गई। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायत करने वाला व्यक्ति खुद इस नेटवर्क का हिस्सा था या उसने केवल जानकारी साझा की थी।

राजस्थान SOG की टीम 8 मई को पहली बार सीकर पहुंची थी। जांच के दौरान कई छात्रों, करियर काउंसलर्स और कोचिंग से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई। एजेंसी ने सीकर में कंसल्टेंसी सेंटर चलाने वाले राकेश मंडावरिया समेत तीन लोगों को शुरुआती दौर में हिरासत में लिया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और अब तक कुल 15 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसियां अब संदिग्धों के डिजिटल डिवाइस और बैंकिंग लेनदेन की भी जांच कर रही हैं।

छात्रों ने NTA को ई-मेल पर भेजी शिकायतें 

मामले में केवल राजस्थान से ही नहीं बल्कि कई छात्रों की ओर से NTA को ई-मेल के जरिए भी शिकायतें भेजी गई थीं। छात्रों ने दावा किया था कि परीक्षा से पहले कुछ सवाल सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर घूम रहे थे। इन शिकायतों और राजस्थान से मिले शुरुआती इनपुट के बाद केंद्र सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। बाद में NTA ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया और जांच CBI को सौंप दी गई। अब पूरे देश के लाखों छात्र नई परीक्षा तारीख का इंतजार कर रहे हैं।

लगातार दूसरी बार NEET परीक्षा को लेकर विवाद सामने आने से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। 2024 में भी पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। इस बार पूरे देश में परीक्षा रद्द होने से छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में सवाल पहले से छात्रों तक पहुंचे हैं तो यह केवल सामान्य गेस पेपर का मामला नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब हर स्तर पर जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

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