August 2, 2026

Sonipat ACB Raid: सोनीपत तहसील में विजिलेंस की बड़ी रेड, क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के नाम पर ₹30,000 रिश्वत लेते क्लर्क गिरफ्तार

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Sonipat ACB Raid: सोनीपत तहसील में विजिलेंस की बड़ी रेड, क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के नाम पर ₹30,000 रिश्वत लेते क्लर्क गिरफ्तार

Sonipat ACB Raid: सोनीपत तहसील में विजिलेंस की बड़ी रेड, क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के नाम पर ₹30,000 रिश्वत लेते क्लर्क गिरफ्तार

Sonipat ACB Raid: सोनीपत। सोनीपत के जिला प्रशासनिक भवन में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने अचानक तहसीलदार कार्यालय के कमरा नंबर-11 में दबिश दी। सेल्स ब्रांच में तैनात कस्टोडियन क्लर्क सचेत को विजिलेंस की टीम ने 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। कार्रवाई इतनी गोपनीय और त्वरित थी कि आरोपी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। ब्यूरो के अधिकारियों ने तुरंत कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर केमिकल से आरोपी के हाथ धुलवाने की प्रक्रिया (फिनोलफ्थलीन टेस्ट) सहित तमाम कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं।

पाकिस्तान से आए विस्थापित परिवार के रिकॉर्ड के नाम पर मांगी घूस

इस पूरे मामले का शिकार बने शिकायतकर्ता विमल किशोर ने भ्रष्ट तंत्र की कलई खोलकर रख दी है। विमल किशोर ने बताया कि उनका परिवार देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर सोनीपत में आकर बसा था। उस दौर में पुनर्वास विभाग की ओर से उन्हें अलॉटमेंट और क्लीयरेंस से जुड़े दस्तावेज सौंपे गए थे। अब जब उन्हें अपनी इस पुश्तैनी संपत्ति की रजिस्ट्री करानी थी, तो तहसील कार्यालय द्वारा क्लीयरेंस सर्टिफिकेट की मांग की गई। विमल का आरोप है कि कस्टोडियन क्लर्क सचेत ने इस सर्टिफिकेट को जारी करने और फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में उनसे 50 हजार रुपये की मोटी रकम मांगी थी, जिसकी पहली किस्त के रूप में 30 हजार रुपये तय हुए थे।

रोहतक और लुधियाना के चक्कर काटने को मजबूर हैं आम लोग

विमल किशोर ने दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार पर दर्द बयां करते हुए कहा कि विभाजन के समय के दशकों पुराने रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध नहीं होते। इन दस्तावेजों को ढूंढने के लिए कई बार रोहतक या पंजाब के लुधियाना स्थित पुराने अभिलेखागारों तक दौड़ लगानी पड़ती है। वहां से भी रिकॉर्ड मिलने की कोई पुख्ता गारंटी नहीं होती। विमल का सीधा आरोप है कि नगर निगम और तहसील के कुछ अधिकारी व कर्मचारी इस मजबूरी का फायदा उठाते हैं। यदि कोई व्यक्ति पैसे खर्च करने को तैयार हो जाए, तो सालों पुरानी गायब फाइलें और अलॉटमेंट लेटर पलक झपकते ही मेज पर आ जाते हैं, वहीं ईमानदार नागरिकों को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर कटवाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।

तहसीलदार और नगर निगम के गठजोड़ पर गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता ने न सिर्फ क्लर्क बल्कि सोनीपत नगर निगम और स्वयं तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विमल किशोर के अनुसार, बिना क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के रजिस्ट्री न करने का नियम सिर्फ आम और गरीब जनता को परेशान करने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों विभागों में नीचे से लेकर ऊपर तक मिलीभगत का एक ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है, जो बिना सुविधा शुल्क (रिश्वत) के जायज फाइलों को भी ठंडे बस्ते में डाल देता है। रिकॉर्ड अपडेट कराने जैसी बुनियादी सहूलियत के लिए भी लोगों पर जानबूझकर दबाव बनाया जाता है।

विजिलेंस ने जाल बिछाकर किया खेल खत्म

दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके विमल किशोर ने हार मानने के बजाय विजिलेंस विभाग का दरवाजा खटखटाया। शिकायत की प्राथमिक जांच के बाद एसीबी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। तय रणनीति के तहत जैसे ही शिकायतकर्ता ने क्लर्क सचेत को पाउडर लगे हुए नोट थमाए, वैसे ही पहले से मुस्तैद विजिलेंस की टीम ने उसे दबोच लिया। एसीबी के अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। आरोपी क्लर्क को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि इस अवैध उगाही के तार तहसील के और किन बड़े अधिकारियों से जुड़े हुए हैं।

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