Search

Breaking: इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा ने दिल्ली एम्स में ली अंतिम सांस, सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को दी थी इजाजत

Mar 24, 2026 5:26 PM

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आज यानी मंगलवार को 31 वर्षीय हरीश राणा का निधन हो गया, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। हरीश पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे और उनका इलाज लंबे समय से चल रहा था। 14 मार्च को उन्हें दिल्ली एम्स में शिफ्ट किया गया था, जहां 16 मार्च को उनकी फीडिंग ट्यूब हटा दी गई। इस प्रक्रिया के तहत उन्हें पैसिव यूथेनेशिया दिया गया, जिसमें मरीज को जीवित रखने वाले कृत्रिम साधनों को हटा लिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हरीश राणा को इच्छामृत्यु की मंजूरी दी थी। यह देश का पहला मामला माना जा रहा है, जिसमें किसी व्यक्ति को अदालत की अनुमति से पैसिव यूथेनेशिया दिया गया। कोर्ट ने सभी मेडिकल और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया था।

परिवार की लंबी लड़ाई

फैसले के बाद हरीश की मां निर्मला देवी ने कहा था कि उन्होंने अपने बेटे के इलाज के लिए हर संभव प्रयास किए। उन्होंने कई बड़े अस्पतालों में इलाज कराया और डॉक्टरों से सलाह ली, लेकिन हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने भावुक होकर कहा था कि अब वह भगवान से बेटे को इस पीड़ा से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना कर रही हैं।

हादसे के बाद बदली जिंदगी

दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। वर्ष 2013 में वह अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिसके बाद उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। तब से वह न बोल सकते थे और न ही किसी तरह की प्रतिक्रिया दे पा रहे थे।

गंभीर बीमारी और जटिल स्थिति

डॉक्टरों ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित बताया था, जिसमें व्यक्ति पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो जाता है। वह फीडिंग ट्यूब और वेंटिलेटर के सहारे जीवित थे। इस बीमारी में ठीक होने की संभावना बेहद कम होती है, जिससे उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

परिवार पर मानसिक और आर्थिक असर

13 साल तक बिस्तर पर रहने के कारण हरीश के शरीर पर गहरे घाव बन गए थे और उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी। इस दौरान उनके इलाज, दवाइयों और देखभाल पर भारी खर्च हुआ, जिससे परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो गया। हरीश की हालत ने परिवार को मानसिक रूप से भी गहराई से प्रभावित किया।

You may also like:

Please Login to comment in the post!