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राम जन्मभूमि पर भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, धर्म ध्वज फहराना इतिहास के स्वर्णिम क्षण : मुर्मू

Mar 19, 2026 9:09 PM

अयोध्या: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को अपनी अयोध्या यात्रा के दौरान भक्तों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राम जन्मभूमि पर भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का उद्घाटन और धर्म ध्वज फहराना - ये सभी हमारे इतिहास के स्वर्णिम क्षण हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू बृहस्पतिवार को अयोध्या में राम मंदिर में विशेष धार्मिक समारोहों के तहत सोने से जड़ित 150 किलोग्राम का श्री राम यंत्र स्थापित करने के बाद एक सभा को संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि इस परम पवित्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन, यहां रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण की तिथियां हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं। 

मुर्मू ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के मर्म-स्पर्शी अवसर पर मैंने प्रधानमंत्री जी को एक पत्र लिखा था। उस पत्र में मैंने यह भाव व्यक्त किया था कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम सब अपने राष्ट्र के पुनरुत्थान के एक नए कालचक्र के शुभारंभ के साक्षी बन रहे हैं। 

उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत जय श्री राम से की और अयोध्या को भगवान राम के लिए स्वर्ग से भी अधिक प्रिय बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान श्री राम का जन्म इसी अयोध्या नगरी में हुआ था और यहां की पवित्र भूमि का स्पर्श करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

उन्होंने शास्त्रों का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान श्री राम ने स्वयं अपने जन्म स्थान को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था। रामचरितमानस में भगवान श्रीराम सीता जी से कहते हैं कि यद्यपि सभी ने बैकुंठ का वर्णन किया है, लेकिन मुझे अवधपुरी सबसे अधिक प्रिय लगती है। उन्होंने कहा कि यह अयोध्या नगरी सभी राम भक्तों को सबसे प्रिय है।

मुर्मू ने भगवान राम की विरासत के सांस्कृतिक और संवैधानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युद्ध जीतने के बाद माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ भगवान श्री राम के अयोध्या आगमन का अत्यंत कलात्मक रेखाचित्र हमारे संविधान की मौलिक छवि में सुशोभित है। यह रेखाचित्र मौलिक अधिकारों के अत्यंत महत्वपूर्ण भाग तीन की शुरुआत में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि मुझे यह जानकर खुशी हुई कि यह चित्र जागरूकता और ज्ञान का संचार कर रही है तथा जनता को संवैधानिक आदर्शों व पवित्र सांस्कृतिक प्रतीकों से जोड़ रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, संवत्सर 2083 की शुरुआत के दिन व नवरात्र के प्रथम दिवस पर यहां आकर मैं स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रही हूं। मैं देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतवासियों और रामभक्तों को नए वर्ष की आत्मिक बधाई देती हूं। नवरात्र के अंत में, रामनवमी के दिन हम सब प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव मनाएंगे। मैं सभी को ‘नवमी तिथि,मधुमास पुनीता’ यानी रामनवमी के दिन मनाए जाने वाले पावन पर्व की अग्रिम बधाई देती हूं।

उन्होंने कहा कि हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या शायद उससे पहले ही हम उन लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे। 21वीं सदी में हमारे समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना राम-राज्य के वर्णन में प्राप्त होती है।

मुर्मू ने कहा कि पिछले दशक के दौरान 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी की सीमा रेखा से ऊपर लाया गया और ऐसे प्रयास किए गए ताकि वे गरीबी से मुक्त रहें।

उन्होंने कहा कि मेरी प्रार्थना है कि प्रभु श्रीराम और सभी देवी-देवताओं एवं दैवी विभूतियों की कृपा सभी देशवासियों पर बनी रहे तथा उन सबकी कृपा से भारत आधुनिक विश्व में राम-राज्य जैसी व्यवस्था स्थापित कर सकें।

राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई कि प्रभु श्रीराम जन्मभूमि के इस पवित्र मंदिर में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आकर दर्शन-लाभ कर चुके हैं। अयोध्या धाम, धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया है। हमारी सनातन चेतना और ऊर्जा से जुड़ा यह मंदिर परिसर, भारत के पुनर्जागरण के पावन प्रतीक के रूप में सदैव पूजनीय बना रहेगा।

इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सभा को संबोधित किया।

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