फर्जी पहचान पत्र और जाली वसीयत; 53 साल पहले मरे बुजुर्ग को जिंदा दिखाकर हड़प ली करोड़ों की जमीन
May 17, 2026 1:15 PM
यमुनानगर: हरियाणा के यमुनानगर में जमीनों के धंधे में धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज और फिल्मी मामला उजागर हुआ है, जिसने पुलिस और प्रशासनिक हलकों को भी हैरत में डाल दिया है। यहाँ एक शातिर प्रॉपर्टी डीलर ने करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने के लिए कानून की आंख में धूल झोंकने की पूरी बिसात बिछाई। आरोपी ने एक ऐसे बुजुर्ग को कागजों में जिंदा कर दिया, जिनकी मौत आज से करीब 53 साल पहले (साल 1973 में) ही हो चुकी थी। इस मृत व्यक्ति के नाम पर न केवल फर्जी पहचान पत्र और पैन कार्ड जैसे संवेदनशील दस्तावेज तैयार किए गए, बल्कि साल 2017 में किसी डमी (फर्जी) व्यक्ति को सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में खड़ा कर वसीयत भी अपने नाम करवा ली गई।
लावारिस संपत्ति देख बदला ईमान, प्रॉपर्टी डीलर ने बुना साजिश का ताना-बाना
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जगाधरी की राजा साहब गली के रहने वाले मोहन लाल ने अदालत और पुलिस का दरवाजा खटखटाया। पीड़ित मोहन लाल के मुताबिक, जोती राम उनके पिता के सगे ताऊ थे। वह जीवनभर अविवाहित और निःसंतान रहे और अपनी आखिरी सांस तक उनके ही परिवार के साथ रहे। जोती राम का निधन 26 मई 1973 को कुरुक्षेत्र जिले की लाडवा तहसील के गांव गुड़ी में हुआ था। चूंकि उनका कोई सीधा वारिस नहीं था, इसलिए उनकी मौत के बाद नियमानुसार पूरी कृषि भूमि और संपत्ति के हकदार मोहन लाल बने। इसी बीच मॉडल कॉलोनी निवासी प्रॉपर्टी डीलर धर्म नारायण की नजर इस करोड़ों की जमीन पर पड़ी और उसने इसे हड़पने की खौफनाक साजिश रच डाली।
दूसरे मृत व्यक्ति के पहचान पत्र का किया इस्तेमाल, ऐसे बदली पहचान
शिकायतकर्ता का आरोप है कि धर्म नारायण ने इस जालसाजी को अंजाम देने के लिए साल 2018 में मर चुके एक अन्य व्यक्ति चमन लाल (निवासी कांसापुर) के आधार नंबर को चुराया। आरोपी ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और दलालों की मदद से चमन लाल के उस असली आधार नंबर पर चमन लाल की जगह जोती राम का नाम और फर्जी फोटो चढ़ा दी। इस जाली पहचान पत्र के आधार पर जोती राम के नाम का एक नया पैन कार्ड भी जारी करवा लिया गया। हद तो तब हो गई जब इसी जाली नंबर के सहारे यमुनानगर नगर निगम में चमन लाल की मौत दर्ज कराई गई, तो वहीं दूसरी तरफ हरिद्वार नगर निगम में इसी नंबर का उपयोग कर जोती राम की मृत्यु तिथि 14 जनवरी 2018 दर्ज करवा दी गई, जबकि जोती राम 1973 में ही पंचतत्व में विलीन हो चुके थे।
कोर्ट में खारिज हुई वसीयत, अब पुलिस कस्टडी की तैयारी
धर्म नारायण ने इस फर्जी पहचान पत्र के बूते 28 जुलाई 2017 को एक अज्ञात बुजुर्ग को जोती राम बनाकर पेश किया और जमीन की वसीयत अपने पक्ष में लिखवा ली। मोहन लाल को जब इस वसीयत की भनक लगी, तो उन्होंने तुरंत जगाधरी कोर्ट में इसे चुनौती दी। अदालत में जब जोती राम के 1973 के मृत्यु रिकॉर्ड और 2017 की वसीयत के दस्तावेजों का मिलान हुआ, तो यह पूरा किला ढह गया। कोर्ट ने इस वसीयत को पूरी तरह जाली मानते हुए रद्द कर दिया।
अदालत से राहत मिलने के बाद मोहन लाल ने सेक्टर-17 थाने में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है। जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर (SI) जसबीर सिंह ने बताया कि आरोपी धर्म नारायण और इस साजिश में शामिल गवाहों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस टीमों को आरोपी की गिरफ्तारी के लिए रवाना कर दिया गया है।