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शाहाबाद ग्रेनेड कांड: कुरुक्षेत्र में एसटीएफ ने दबोचे दो और आतंकी गुर्गे, सरहद पार से जुड़े हैं तार

May 17, 2026 1:29 PM

कुरुक्षेत्र। हरियाणा में पैर पसारने की कोशिश कर रहे अंतरराष्ट्रीय आतंकी सिंडिकेट और गैंगस्टर नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने शाहाबाद ग्रेनेड मामले में दो और शातिर गुर्गों को सलाखों के पीछे धकेल दिया है। शाहाबाद शुगर मिल के पास स्थित महादेव मोटर यार्ड में खड़ी एक कबाड़ कार से हैंड ग्रेनेड मिलने के बाद से ही केंद्रीय जांच एजेंसियां और एसटीएफ लगातार इस नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी थीं। इसी कड़ी में पुलिस ने पिहोवा के रहने वाले बलजीत और ठोल गांव के चंद्रपाल को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों ने साफ कर दिया है कि हरियाणा के शांत इलाकों में बारूद का खेल खेलने की साजिशें सरहद पार और विदेशों में बैठकर रची जा रही हैं।

ईंट भट्टे के पास बनता था बारूद का गोदाम, आकाओं के इशारे पर होती थी डिलीवरी

जांच अधिकारी दलजीत सिंह के मुताबिक, पकड़े गए दोनों आरोपी बलजीत और चंद्रपाल महज मोहरे हैं, जिनकी डोर विदेशों में बैठे खालिस्तानी या गैंगस्टर आकाओं के हाथ में थी। पूछताछ में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपियों ने कुबूल किया है कि उन्हें विदेशों से 'लोकेशन' और निर्देश मिलते थे, जिसके बाद वे गुप्ता ईंट भट्टे के पास सुनसान जगह पर हैंड ग्रेनेड छुपा देते थे। इतना ही नहीं, जब भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देना होता था या हथियारों की सप्लाई आगे भेजनी होती थी, तो इन्हीं के जरिए उन विस्फोटकों को वहां से उठाया जाता था। यह सिलसिला पिछले काफी समय से चल रहा था।

नोनी राणा के खुलासे ने बढ़ाई धड़कनें, वर्कशॉप तक पहुंचे थे मौत के सौदागर

एसटीएफ की इस सफलता की नींव मुख्य आरोपी सूर्य प्रताप सिंह उर्फ नोनी राणा के पुलिस रिमांड के दौरान रखी गई थी। नोनी राणा से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने बलजीत और चंद्रपाल के नामों की उलझी कड़ियों को सुलझा दिया। हालांकि, नोनी राणा का रिमांड पूरा होने के बाद उसे अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया है, लेकिन उसके बयानों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। जांच में सामने आया है कि विदेशी हैंडलर्स के कहने पर ही नोनी राणा ईंट भट्टे के ठिकाने से एक हैंड ग्रेनेड उठाकर लाया था और उसने अपनी वर्कशॉप में खड़ी एक स्क्रैप (कबाड़) कार के भीतर उसे बेहद शातिर तरीके से छिपा दिया था, जिसे समय रहते बरामद कर लिया गया।

दूसरा हैंड ग्रेनेड बना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द, बड़े हमले की आशंका

इस पूरे मामले में एक ग्रेनेड की बरामदगी और तीन गिरफ्तारियों के बाद भी जांच एजेंसियों के चेहरे पर शिकन साफ देखी जा सकती है। इसकी वजह है 'दूसरा हैंड ग्रेनेड'। पूछताछ में यह बात पुख्ता हो चुकी है कि आतंकियों ने दो ग्रेनेड भेजे थे। पहला ग्रेनेड तो बरामद हो चुका है, लेकिन दूसरा ग्रेनेड किसने उठाया, वह इस समय किस स्लीपर सेल या गैंगस्टर के पास है और उसे कहाँ ले जाया गया है, इस पर अभी तक सस्पेंस बरकरार है।गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों में से कोई भी दूसरे ग्रेनेड की सटीक लोकेशन उगलने को तैयार नहीं है। एसटीएफ और अन्य खुफिया विंग्स का मानना है कि जब तक दूसरा जिंदा हैंड ग्रेनेड बरामद नहीं हो जाता, तब तक सूबे पर मंडरा रहा बड़े हमले या किसी वीआईपी को निशाना बनाने की साजिश का खतरा टला नहीं माना जा सकता। फिलहाल, पुलिस अन्य कड़ियों को जोड़ते हुए छापेमारी कर रही है।

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