Karnal News: 33 घंटे बाद अंतिम संस्कार पर माना परिवार, 14 लोगों पर FIR

33 घंटे बाद अंतिम संस्कार पर माना परिवार, 14 लोगों पर FIR
Karnal News: मुनीश मुंडे, करनाल। हरियाणा के करनाल में बिजली निगम (UHBVN) के सस्पेंडेड अधीक्षण अभियंता (SE) गीतूराम तंवर द्वारा आत्महत्या किए जाने के 33 घंटे बाद आखिरकार बुधवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। एडीसी राहुल रईया और डीएसपी राजीव कुमार की मौजूदगी में प्रशासनिक अधिकारियों और परिजनों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। प्रशासन द्वारा तीन प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद ही परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने और अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी (SIT) गठित कर दी गई है, जिसमें आईपीएस अधिकारी रविंद्र, डीएसपी मीना और सेक्टर-9 चौकी प्रभारी संदीप कुमार को शामिल किया गया है। इसके अलावा तंवर के सभी रुके हुए भत्ते 10 दिनों में रिलीज करने और उनकी पत्नी की नई शिकायत के आधार पर एफआईआर को संशोधित करने का लिखित भरोसा दिया गया है।
2 नाम बाहर, 4 नए जोड़े: 14 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई संशोधित FIR
मामले में 31 अगस्त को पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी, लेकिन बुधवार को सामने आई संशोधित एफआईआर में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। तंवर की पत्नी प्रीति की शिकायत को शामिल करते हुए अब कुल 14 लोगों को नामजद किया गया है।
सुसाइड नोट में नामजद 2 एसई (धर्म सुहाग और अजय कोहड़) के नाम पत्नी की अर्जी के आधार पर एफआईआर से हटा दिए गए हैं। वहीं, 3 नए एसडीओ (नवीन दलाल, ओमबीर धनखड़, टोनू कोहाड़) और ‘हरियाणा भाईचारा मीडिया’ का नाम नया जोड़ा गया है।
अब यूएचबीवीएन के एमडी आईएएस अधिकारी विक्रम सिंह, 3 एक्सईएन (रणबीर देशवाल, अश्वनी कौशिक, राज सिंह), 1 एसई (मनिंद्र सिंह), 1 अंडर सेक्रेटरी (मोहित भटनागर) और 7 एसडीओ समेत 14 आरोपियों के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 351(3) और एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) की धारा 3(1)(एस) के तहत केस दर्ज किया गया है।
पत्नी प्रीति का आरोप- ‘सोशल मीडिया पर दी जाती थीं जान से मारने की धमकियां’
प्रीति तंवर ने एफआईआर में नए नाम जुड़वाने की वजह बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि नवीन दलाल, ओमबीर धनखड़, टोनू कोहाड़ और हरियाणा भाईचारा मीडिया के जरिए उनके पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
शिकायत के मुताबिक, सोशल मीडिया पर गीतूराम को लगातार नीचा दिखाया जा रहा था, जातिसूचक शब्द कहे जाते थे और जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। तंवर ने परिजनों को बताया था कि आरोपी दबाव बना रहे थे कि या तो वह खुद अपनी जान दे दें या फिर उनके पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा।
‘अब न्याय के लिए हमें मत बुलाना’— अंतिम संस्कार से भड़के समाज के लोग
एक तरफ प्रशासन और परिवार के बीच सहमति बनी, तो दूसरी तरफ तंवर के घर पर मौजूद समाज के नेताओं और प्रतिनिधियों में भारी आक्रोश फैल गया। एडवोकेट सोनिया तंवर और अमित तंवर समेत कई लोगों ने परिवार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया। समाज के लोगों का कहना था कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं होना चाहिए था।
हंगामे के दौरान समाज के एक नेता ने नाराजगी जताते हुए कहा, “अगर परिवार पर किसी तरह का सरकारी दबाव था तो उन्हें समाज को बताना चाहिए था। गीतूराम सुसाइड से पहले सिर्फ परिवार के थे, लेकिन मौत के बाद वह पूरे समाज के बन चुके हैं। जब हम न्याय की लड़ाई लड़ने आए थे, तो अचानक अंतिम संस्कार का फैसला क्यों ले लिया गया?” बहस इतनी बढ़ी कि समाज के कई प्रतिनिधि यह कहकर वहां से निकल गए कि “अब गीतू को न्याय दिलाने के लिए हमें कभी मत बुलाना।”
10 दिन में मिलेंगे रिटायरमेंट लाभ, एडिटेड वीडियो की भी होगी जांच
पारिवारिक मित्र राजकुमार कटारिया ने बताया कि तंवर पिछले कुछ महीनों से सस्पेंड चल रहे थे और मंगलवार को उनका जन्मदिन होने के साथ-साथ रिटायरमेंट की तारीख भी थी। अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
कटारिया ने कहा कि प्रशासन ने माना है कि सोशल मीडिया पर कुछ कट-पेस्ट (एडिटेड) वीडियो चलाकर तंवर की छवि खराब की गई थी, जिसकी जांच अब एसआईटी करेगी। सरकार और प्रशासन ने 10 दिन के भीतर तंवर के रिटायरमेंट से जुड़े सभी वित्तीय लाभ जारी करने और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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