Haryana News: 24 घंटे की हड़ताल से हड़कंप, 16 सितंबर से निजी अस्पताल पूरी तरह बंद करने की चेतावनी

24 घंटे की हड़ताल से हड़कंप, 16 सितंबर से निजी अस्पताल पूरी तरह बंद करने की चेतावनी
Haryana News: हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए इलाज के एवज में निजी अस्पतालों को मिलने वाले करोड़ों रुपये के सरकारी भुगतान में हो रही भारी देरी अब आर-पार की जंग में बदल गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के आह्वान पर मंगलवार को प्रदेश भर के निजी अस्पतालों ने 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल रखी। इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ा और आयुष्मान कार्ड धारक मरीज व उनके बेबस परिजन इलाज की आस में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर काटते नजर आए।
आईएमए के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में इस योजना के तहत रोजाना औसतन 2,000 से 2,500 क्लेम दाखिल किए जाते हैं, लेकिन मंगलवार को डॉक्टरों के विरोध के चलते एक भी दावा सिस्टम में दर्ज नहीं हुआ। एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार ने जल्द उनकी फाइलें पास कर फंड रिलीज नहीं किया, तो 16 सितंबर से राज्य भर के सभी निजी अस्पताल अनिश्चितकाल के लिए सेवाएं बंद कर देंगे।
रोहतक से यमुनानगर तक टले सैकड़ों ऑपरेशन, हिसार में 250 करोड़ अटके
सांकेतिक हड़ताल का सबसे बड़ा खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ा जिनकी सर्जरी पहले से तय थी। यमुनानगर में अकेले 230 ऑपरेशन टालने पड़े, वहीं रोहतक में 30, भिवानी में 30, फतेहाबाद में 20, पानीपत में 10 और चरखी दादरी में 6 ऑपरेशन एन मौके पर टाल दिए गए। जींद में भी निजी सेंटरों पर कोई नया ऑपरेशन नहीं किया गया।
सबसे खराब हालात हिसार जिले में देखने को मिले, जहां 84 निजी अस्पतालों का पिछले छह महीनों से लगभग 250 करोड़ रुपये का बकाया फंसा हुआ है। बकाये से परेशान होकर हिसार के 14 अस्पतालों ने तो आयुष्मान योजना के पैनल से ही खुद को बाहर कर लिया है।
डायलिसिस और कीमोथेरेपी के लिए तरसते रहे मरीज
हड़ताल के कारण गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की हालत बेहद दयनीय रही। हिसार के ढंदूर गांव से आए एक लाचार पिता अपने 30 वर्षीय बेटे की अर्जेंट डायलिसिस के लिए निजी अस्पतालों के दरवाजे खटखटाते रहे, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। ऐसा ही मंजर तब दिखा जब एक पोता अपने बुजुर्ग दादा की कीमोथेरेपी के लिए आयुष्मान कार्ड हाथ में लिए अस्पताल के चक्कर काटता नजर आया।
हालांकि, झज्जर और रेवाड़ी जिलों में मरीजों को राहत रही और वहां स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं। फतेहाबाद में 23 पैनलबद्ध अस्पतालों में काम ठप रहा, हालांकि स्वास्थ्य विभाग दावा करता रहा कि आधे अस्पतालों में इलाज जारी था।
पूर्व सूचना से भिवानी में संभले हालात, सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा बोझ
भिवानी के निजी डॉक्टरों ने समझदारी दिखाते हुए मरीजों को हड़ताल की सूचना पहले ही दे दी थी। इससे अचानक होने वाली अफरा-तफरी तो बच गई और 30 पूर्व-निर्धारित ऑपरेशन टाल दिए गए, लेकिन मरीजों का रुख सिविल अस्पतालों की तरफ हो गया।
निजी क्षेत्र में ताले लटकने की वजह से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी और आपातकालीन विभागों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे सरकारी व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव देखने को मिला।
यह भी पढ़ें– अंबाला जेल पहुंची NIA, पाक डॉन शहजाद भट्टी के गुर्गे से 2 घंटे तक पूछताछ
