September 15, 2026

Sonipat Fake Coins: सोनीपत में 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश, 5 गिरफ्तार

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Sonipat Fake coins: सोनीपत में 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश, 5 गिरफ्तार,

सोनीपत में 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश, 5 गिरफ्तार,

Sonipat Fake coins: हरियाणा की औद्योगिक नगरी सोनीपत से जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश की सहारनपुर कोतवाली नगर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए सोनीपत के ‘बड़ी इंडस्ट्रियल एरिया’ में चल रही ₹20 के नकली सिक्के बनाने वाली मिंटिंग फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है।

पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया है कि वे पिछले 6 महीनों में 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के देश के अलग-अलग हिस्सों में खपा चुके हैं, जिसकी पुलिस गहनता से जांच कर रही है।

सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अभिनंदन सिंह ने पत्रकार वार्ता में बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट पर शिकंजा कसा है। मौके से 6,400 तैयार नकली सिक्के, करीब 5 लाख रुपये मूल्य के अधबने सिक्के, 6 भारी-भरकम मशीनें, 64 डाई, फिनिशिंग उपकरण, 7 रजिस्टर, चेकबुक, 8 मोबाइल फोन और 2 कारें बरामद की गई हैं। यह गिरोह सोनीपत की तर्ज पर सहारनपुर में भी एक नई फैक्ट्री स्थापित करने की फिराक में जमीन तलाश रहा था, लेकिन उससे पहले ही दबोच लिया गया।

25 साल से नकली सिक्के बनाने के धंधे में था सरगना: तिहाड़ जेल में बना सिंडिकेट

पुलिस जांच में गिरोह के सरगना उपकार लूथरा (निवासी पंजाब) का पुराना आपराधिक इतिहास सामने आया है। एसएसपी के मुताबिक, उपकार वर्ष 2001 यानी पिछले 25 सालों से सिक्के बनाने की कला से जुड़ा हुआ था। शुरुआत में वह सुनार का काम करता था और चांदी के सिक्के ढालता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात नकली नोट और सिक्के बनाने वाले गिरोहों से हुई। अधिक मुनाफे के लालच में उसने नकली सिक्के ढालना शुरू कर दिया।

पूर्व में तिहाड़ जेल समेत कई अन्य जेलों में बंद रहने के दौरान उपकार की मुलाकात कई शातिर अपराधियों से हुई। जेल से बाहर आने के बाद उसने इन्हीं अपराधियों को जोड़कर अपना नेटवर्क तैयार किया। गिरफ्तार किए गए अन्य 4 आरोपियों की पहचान हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन और अनुराग पाल उर्फ लंकेश के रूप में हुई है।

रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के बनाने की थी क्षमता, शराब ठेकों और टोल टैक्स पर होती थी सप्लाई

सोनीपत की बड़ी इंडस्ट्रियल एरिया में लगी यह फैक्ट्री किसी वैध मिंटिंग प्रेस की तरह काम कर रही थी। यहां आधुनिक मशीनों और विशेष डाई की मदद से रोज 10,000 से 12,000 तक सिक्के तैयार किए जाते थे। सिक्कों की चमक, वजन और फिनिशिंग पर इस कदर काम किया जाता था कि पहली नजर में आम आदमी या कारोबारी के लिए असली और नकली में फर्क करना लगभग नामुमकिन था।

आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि सिक्कों की सप्लाई के लिए उन्होंने बेहद शातिराना नेटवर्क तैयार कर रखा था। तैयार सिक्कों की खेप को थोक के भाव में बिचौलियों को दिया जाता था, जो इन्हें छोटे दुकानदारों, सब्जी मंडियों, सरकारी शराब ठेकों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने टोल प्लाजा पर आसानी से चला देते थे। चूंकि ₹20 के सिक्कों पर आमतौर पर लोग ज्यादा संदेह नहीं करते, इसलिए यह गिरोह बेखौफ होकर बाजार में सिक्कों की खेप उतार रहा था। पुलिस अब इस पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

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