"सिस्टम फेल!" अंबाला छावनी बस अड्डे पर सुरक्षा और सुविधाओं का बुरा हाल, घंटों बंद रहे निगरानी कैमरे
May 04, 2026 5:22 PM
अंबाला (जग मार्ग)। रविवार की सुबह आई तेज आंधी और बारिश ने अंबाला छावनी बस अड्डे की व्यवस्थाओं की कलई खोलकर रख दी। करीब छह घंटे तक पूरा परिसर 'ब्लैकआउट' की चपेट में रहा, जिससे न केवल यात्री उमस और प्यास से बेहाल नजर आए, बल्कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी धड़ाम हो गए। हैरानी की बात यह रही कि करोड़ों के बजट वाले रोडवेज विभाग की लापरवाही के कारण यहां महीनों पहले आया नया जनरेटर महज एक 'शो-पीस' बनकर रह गया है।
सुरक्षा और सुविधा दोनों पर पड़ा असर
बिजली गुल होने का सबसे गंभीर असर सुरक्षा व्यवस्था पर देखा गया। बस अड्डे की निगरानी के लिए लगाए गए दर्जनों सीसीटीवी कैमरे बंद रहे, जिससे अराजक तत्वों पर नजर रखना नामुमकिन हो गया। इसके अलावा, यात्रियों को बसों की लोकेशन और समय बताने वाली एलईडी स्क्रीन्स ने भी काम करना बंद कर दिया। डिजिटल इंडिया के दौर में कंप्यूटर और सर्वर ठप होने का खामियाजा उन कर्मचारियों को भुगतना पड़ा, जो दूर-दराज से अपने बस पास बनवाने आए थे। सरकारी और फैक्ट्री कर्मचारियों को बिना पास बनवाए ही मायूस होकर लौटना पड़ा।
वाटर कूलर बने 'शोभा की वस्तु', प्यास से तड़पे यात्री
बस अड्डे पर लगे तीनों वाटर कूलर बिजली के बिना साधारण टैंक बनकर रह गए। भीषण उमस के बीच यात्रियों को ठंडा पानी मयस्सर नहीं हुआ। परिसर में लगे फर्राटा पंखे भी थमे रहे, जिससे बस का इंतजार कर रहे बुजुर्गों और बच्चों की हालत खराब हो गई। रोडवेज प्रबंधन की सबसे बड़ी नाकामी यह रही कि पांच महीने पहले खरीदा गया नया जनरेटर आज तक चालू नहीं हो सका है। विभागीय सुस्ती के कारण इसके कनेक्शन तक नहीं किए गए हैं, जिसके चलते आपात स्थिति में लाखों की मशीनरी धूल फांक रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
रोडवेज कर्मचारियों ने बताया कि बिजली कटते ही तुरंत बिजली निगम को सूचित किया गया था, लेकिन वहां से भी रेस्पॉन्स मिलने में देरी हुई।
वहीं, इस मामले में बिजली निगम के क्वालिटी सब-स्टेशन (अंबाला छावनी) के एसडीओ मोहित ने स्पष्टीकरण देते हुए बताया:
"होटल डी मेटरोपोल के पास स्थित ट्रांसफार्मर की एलटी तारें आंधी और बारिश के कारण गिर गई थीं, जिससे जंपर उड़ गए। टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य किया और दोपहर दो बजे तक आपूर्ति पूरी तरह बहाल कर दी गई।"
भले ही बिजली निगम ने फाल्ट ठीक कर दिया हो, लेकिन इस छह घंटे के 'संकट' ने बस अड्डा प्रबंधन की पोल खोल दी है। यात्रियों का सवाल है कि जब बैकअप के लिए जनरेटर मौजूद है, तो उसे चालू करने में पांच महीने का समय क्यों लग रहा है?