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करनाल में मजदूर से 2000 रुपये लूटने के लिए चाकू से गोद डाला चेहरा, टांगें भी तोड़ीं

May 04, 2026 5:21 PM

करनाल। करनाल के फुसगढ़ इलाके में अपराध का एक ऐसा क्रूर चेहरा सामने आया है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। बिहार का रहने वाला बलिंद्र, जो यहाँ दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता है, देर रात बदमाशों की हैवानियत का शिकार हो गया। बताया जा रहा है कि 2-3 नकाबपोश बदमाशों ने उसे रास्ते में घेर लिया और उसकी जेब में रखे मात्र 2 हजार रुपये छीनने की कोशिश की। जब बलिंद्र ने अपनी मेहनत की कमाई देने से मना किया, तो बदमाशों ने उस पर रॉड और चाकू से ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए। हमलावरों ने उसके चेहरे को चाकू से बुरी तरह गोद दिया और रॉड मारकर उसकी टांगें तोड़ डालीं।

सिस्टम की बेरुखी: तड़पता रहा घायल, पुलिस ने समझा शराबी

इस घटना ने जहाँ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, वहीं 'डायल-112' की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। वारदात के बाद जब पुलिस की पीसीआर टीम मौके पर पहुँची, तो आरोप है कि उन्होंने लहूलुहान बलिंद्र को अस्पताल पहुँचाने की जहमत तक नहीं उठाई। पुलिसकर्मियों ने उसे शराब के नशे में धुत समझकर सड़क किनारे उसी हाल में तड़पता हुआ छोड़ दिया। पूरी रात बलिंद्र खून से लथपथ होकर मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन सिस्टम की संवेदनहीनता ने उसे लावारिस बना दिया।

सामाजिक संस्था बनी फरिश्ता, अस्पताल में जंग लड़ रहा पीड़ित

सुबह जब रोशनी हुई, तब एक स्थानीय सामाजिक संस्था की नजर इस घायल मजदूर पर पड़ी। संस्था के सदस्यों ने तुरंत उसे करनाल के ट्रॉमा सेंटर पहुँचाया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, बलिंद्र के चेहरे और शरीर पर गहरे जख्म हैं और अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। इस खौफनाक वारदात के बाद फुसगढ़ और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। दिहाड़ी मजदूरों में डर है कि अब रात के समय काम से घर लौटना भी सुरक्षित नहीं रहा।

पुलिस की सफाई और कार्रवाई का आश्वासन

मामले के तूल पकड़ने के बाद अब करनाल पुलिस हरकत में आई है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश के लिए टीमें लगा दी गई हैं। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। साथ ही, डायल-112 के कर्मचारियों पर लगे लापरवाही के आरोपों की भी आंतरिक जांच की बात कही जा रही है। सवाल यह है कि क्या 2 हजार रुपये की कीमत एक इंसान की जान से बढ़कर हो गई है?

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