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कलायत मंडी में तौल पर बवाल: सरकारी एजेंसियों पर धांधली का आरोप, उपायुक्त तक पहुँचा मामला

May 04, 2026 5:54 PM

कलायत (जग मार्ग)। अनाज मंडी कलायत में गेहूं खरीद सीजन के चरम पर पहुँचने के साथ ही अब तौल की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। मंडी एसोसिएशन ने सरकारी खरीद एजेंसियों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए सीधे तौर पर धांधली के आरोप लगाए हैं। इस संबंध में उपायुक्त (DC) को भेजी गई एक लिखित शिकायत में एसोसिएशन ने आशंका जताई है कि सरकारी कांटों और निजी वजन के बीच जो 'गैप' आ रहा है, वह किसी बड़ी गड़बड़ी का हिस्सा हो सकता है।

15 लाख बैगों की खरीद और हेराफेरी का शक

एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस सीजन में अब तक तीन सरकारी एजेंसियां करीब 15 लाख गेहूं के कट्टों की खरीद कर चुकी हैं। आरोप है कि ये एजेंसियां अपने स्तर पर निजी कांटों का उपयोग कर गेहूं की उतरवाई करवा रही हैं। व्यापारियों और आढ़तियों का दावा है कि जब वे अपने स्तर पर वजन करते हैं और जब सरकारी एजेंसियां तौल करती हैं, तो दोनों के आंकड़ों में भारी विसंगति देखने को मिल रही है।

व्यापारियों के अनुसार, "इन कांटों के वजन में हेराफेरी के कारण पूरी मंडी में असमंजस और अविश्वास की स्थिति बनी हुई है। इसका सीधा आर्थिक नुकसान न केवल व्यापारियों को हो रहा है, बल्कि किसान भी अपनी मेहनत की कमाई में हो रही इस 'अदृश्य कटौती' से चिंतित हैं।"

बाट एवं माप विभाग से जांच की मांग

अनाज मंडी संगठन ने जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की पुरजोर मांग की है। उनकी मुख्य मांग है कि 'बाट एवं माप विभाग' (Weights and Measures Department) के विशेषज्ञों की एक टीम गठित कर इन कांटों की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

विभाग की सफाई: "कैथल के सरकारी कांटे पर तौल कराया, कोई अंतर नहीं मिला"

लगातार उठ रहे सवालों और आरोपों पर खरीद एजेंसियों ने अपना पक्ष रखते हुए इन्हें सिरे से खारिज कर दिया है। हेफेड इंस्पेक्टर संजीव ढुल ने बताया कि व्यापारियों की शिकायतों को विभाग ने गंभीरता से लिया था।

उन्होंने स्पष्ट किया, "व्यापारियों के संदेह को दूर करने के लिए कलायत में स्थापित तीनों सरकारी कांटों के वजन का प्राइवेट धर्मकांटों के साथ क्रॉस-चेक करवाया गया था। शुरुआत में बेहद मामूली अंतर दिखा था, जिसे तकनीकी तौर पर सामान्य माना जा सकता है। फिर भी, पूरी पारदर्शिता बरतने के लिए हम स्टॉक को कैथल स्थित सरकारी कांटे पर ले गए और वहां पुन: तौल करवाया गया। कैथल में किए गए वेट के दौरान वजन में कोई अंतर नहीं पाया गया है।"

भले ही विभाग क्लीन चिट दे रहा हो, लेकिन मंडी एसोसिएशन की नाराजगी कम होती नहीं दिख रही है। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस तकरार के बीच गेहूं उठान और तौल की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल पाएगी या नहीं।


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