दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की मनमानी खत्म! अब नहीं मांग सकेंगे एडवांस फीस, शिक्षा निदेशालय का सख्त आदेश
May 04, 2026 5:36 PM
दिल्ली। राजधानी दिल्ली के निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले लाखों अभिभावकों के लिए एक सुकून भरी खबर आई है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने साफ कर दिया है कि प्राइवेट स्कूल अब अपनी मर्जी से फीस का बोझ अभिभावकों पर नहीं लाद पाएंगे। निदेशालय ने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी स्कूल मैनेजमेंट अभिभावकों से एक साथ तीन महीने या उससे अधिक की फीस एडवांस में जमा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है ताकि शिक्षा के नाम पर होने वाली इस व्यावसायिक मनमानी को रोका जा सके।
आर्थिक बोझ से मिलेगी राहत, मर्जी के बिना वसूली नहीं
अक्सर देखा जाता है कि कई बड़े स्कूल क्वार्टरली (तिमाही) फीस के नाम पर एक साथ भारी-भरकम रकम मांगते हैं, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ जाता है। नए नियम के तहत अब स्कूलों को केवल मासिक आधार पर ही फीस लेने की अनुमति होगी। हालांकि, यदि कोई अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार खुद ही एडवांस फीस देना चाहता है, तो स्कूल उसे स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन इसे अनिवार्य शर्त के तौर पर लागू करना अब नियमों के खिलाफ होगा। यह फैसला सीधे तौर पर उन परिवारों के पक्ष में है जो हर महीने अपनी कमाई के हिसाब से खर्चों का प्रबंधन करते हैं।
कड़े तेवर: नियम तोड़ा तो छिनी जा सकती है मान्यता
सरकार ने केवल आदेश जारी नहीं किए हैं, बल्कि इन्हें सख्ती से लागू करने के लिए निगरानी तंत्र भी तैयार किया है। शिक्षा निदेशालय ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल एडवांस फीस के लिए दबाव बनाता पाया गया, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बेहद गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता तक रद्द करने का प्रावधान किया गया है। संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को नियमित रूप से स्कूलों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
पारदर्शिता के लिए नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी जानकारी
आदेश के मुताबिक, दिल्ली के सभी निजी स्कूलों को इस नए फीस नियम की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड और आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि वे मासिक आधार पर फीस स्वीकार करेंगे। इस पारदर्शिता का उद्देश्य यह है कि किसी भी अभिभावक को उनके अधिकारों की जानकारी रहे और वे किसी भी अनुचित दबाव का शिकार न हों। अभिभावकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि यह न केवल उनके आर्थिक हितों की रक्षा करता है बल्कि स्कूलों की मनमानी पर भी लगाम लगाता है।