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अंबाला NH 152-D कैमरा केस: पाकिस्तान भेज रहे थे सेना की लाइव फुटेज, सीआईए ने पंजाब से दबोचे दो जासूस

May 18, 2026 4:26 PM

अंबाला। अंबाला में नेशनल हाईवे 152-D पर कुछ दिनों पहले मिले संदिग्ध कैमरों के मामले में एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों और देश की संप्रभुता से जुड़े इस गंभीर मामले की जांच कर रही अंबाला सीआईए-1 (CIA-1) की टीम ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पंजाब से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों के तार सीधे तौर पर सरहद पार पाकिस्तान से जुड़े होने की बात सामने आई है। ये आरोपी हाईवे पर अवैध तरीके से खुफिया कैमरे इंस्टॉल कर भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की हर हरकत पर पैनी नजर रख रहे थे।

शंभू टोल प्लाजा के पास एएसआई की सतर्कता से खुला था राज

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश तब हुआ, जब अंबाला के थाना सेक्टर-9 में तैनात एएसआई रविश कुमार एक अन्य मामले की तफ्तीश के सिलसिले में शंभू टोल प्लाजा के पास पहुंचे थे। वहां पुल पर अचानक उनकी नजर दो ऐसे कैमरों पर पड़ी, जिनका फोकस पूरी तरह दिल्ली की तरफ आने-जाने वाले नेशनल हाईवे के मुख्य मार्ग पर था। जब पुलिस ने इस बारे में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और स्थानीय टोल प्रबंधन से जवाब मांगा, तो दोनों ही विभागों ने इन कैमरों के बारे में अनभिज्ञता जताते हुए साफ पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद अंबाला के पुलिस अधीक्षक (SP) अजीत सिंह शेखावत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत इस 'ब्लाइंड केस' की कमान सीआईए-1 को सौंप दी थी।

पाकिस्तान से मिले थे मोटी रकम के ऑफर, कोड और पासवर्ड किए शेयर

सीआईए-1 की टीम ने साइबर सेल की मदद और तकनीकी इनपुट्स के जरिए जाल बिछाते हुए पंजाब के तरनतारन निवासी मनप्रीत उर्फ मन्नी और फिरोजपुर के रहने वाले अनमोल को दबोच लिया। एसपी अंबाला ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन्होंने माना कि वे पाकिस्तान में बैठे कुछ संदिग्ध हैंडलर्स के साथ सीधे संपर्क में थे। आरोपियों को इस देश विरोधी काम के लिए मोटी रकम का लालच दिया गया था। इस रकम के बदले दोनों ने हाईवे पर लगाए गए इन हाई-टेक कैमरों का आईपी एड्रेस, पासवर्ड और इंटरनेट के लिए इस्तेमाल हो रही सिम कार्ड की लाइव डिटेल्स पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को भेज दी थीं, ताकि वे वहां बैठकर सीधे लाइव स्ट्रीमिंग देख सकें।

5 दिन का रिमांड मंजूर, अब बड़ी कड़ियों को जोड़ने में जुटी पुलिस

पकड़े गए दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस ने 5 दिनों का रिमांड हासिल किया है। इस अवधि के दौरान केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस की स्पेशल टीमें संयुक्त रूप से पूछताछ करेंगी। जांच का मुख्य केंद्र अब यह पता लगाना है कि इन कैमरों को खरीदने के लिए फंडिंग कहां से हुई, इन्हें इंस्टॉल करने में और किन स्थानीय लोगों ने मदद की और अब तक भारतीय सेना की मूवमेंट का कितना संवेदनशील डेटा सरहद पार भेजा जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि रिमांड के दौरान इस देश विरोधी नेटवर्क के कई और बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय है

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