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अंबाला के 'नन्हे वैज्ञानिकों' का कमाल: वेस्ट प्लास्टिक से बना रहे 'काला सोना', 13 हजार की मशीन से प्रदूषण पर प्रहार

May 04, 2026 4:42 PM

अंबाला (जग मार्ग)। प्लास्टिक कचरा, जो आज पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बना हुआ है, अब अंबाला के छात्रों के लिए 'ईंधन' का जरिया बन गया है। अंबाला शहर के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान के पांच होनहार छात्रों ने एक ऐसी किफ़ायती मशीन ईजाद की है, जो कूड़े में फेंके गए प्लास्टिक को तरल ईंधन (तेल) में तब्दील कर सकती है। छात्रों का यह नवाचार न केवल कचरा प्रबंधन का समाधान पेश कर रहा है, बल्कि भविष्य के लिए एक सस्ते ऊर्जा स्रोत की उम्मीद भी जगा रहा है।

पायरोलिसिस तकनीक: बिना धुएं के कचरे का निपटारा

संस्थान के इन छात्रों ने अपनी इस मशीन को 'पायरोलिसिस ऑफ प्लास्टिक वेस्ट टू फ्यूल रिकवरी' (Pyrolysis of plastic waste to Fuel Recovery) नाम दिया है। इस मशीन की कार्यप्रणाली को समझाते हुए छात्रों ने बताया कि इसमें प्लास्टिक को ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में 350 से 400 डिग्री सेल्सियस के उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है। जब प्लास्टिक इस भीषण गर्मी के संपर्क में आता है, तो वह जलने के बजाय गैस में बदल जाता है। इसके बाद एक कंडेनसर पाइप के जरिए इस गैस को ठंडा किया जाता है, जिससे यह तरल ईंधन (तेल) का रूप ले लेती है। इस पूरी प्रक्रिया में हानिकारक धुआं बाहर नहीं निकलता, जिससे वायु प्रदूषण का खतरा शून्य हो जाता है।

दो महीने की मेहनत और मात्र 13 हजार का खर्च

छात्रों की टीम ने बताया कि इस प्रोटोटाइप को तैयार करने में उन्हें लगभग दो महीने का समय लगा। सबसे खास बात इस मशीन की लागत है। कांच और धातु के इस्तेमाल से बनी इस मशीन को तैयार करने में महज 12 से 13 हजार रुपये का खर्च आया है। प्रक्रिया बेहद सरल है: सबसे पहले वेस्ट प्लास्टिक को इकट्ठा कर उसे धोया जाता है, फिर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर मशीन के विशेष चैंबर में डाल दिया जाता है। चैंबर के नीचे लगी भट्टी जैसे ही तापमान बढ़ाती है, पाइपलाइन के दूसरे छोर से ईंधन मिलना शुरू हो जाता है।

डीजल-पेट्रोल का बन सकता है विकल्प

संस्थान के शिक्षक राहुल ने इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि यह तकनीक पर्यावरण के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। उन्होंने बताया, "फिलहाल हमने इसे छोटे स्तर पर तैयार किया है, लेकिन अगर इसे बड़े पैमाने पर विकसित किया जाए, तो शहरों से निकलने वाले मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे को उपयोगी तेल में बदला जा सकता है। इस तेल को रिफाइन करके डीजल और पेट्रोल के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना भी संभव है।"

पॉलीथिन की गंदगी से मिलेगी निजात

अब तक प्लास्टिक को नष्ट करने का एकमात्र तरीका उसे जलाना या जमीन में दबाना माना जाता था, जो दोनों ही पर्यावरण के लिए घातक हैं। लेकिन अंबाला के इन छात्रों ने दिखा दिया है कि जिसे हम कचरा समझते हैं, वह दरअसल एक संसाधन है। इस मशीन के जरिए न केवल गलियों में बिखरी पॉलीथिन कम होगी, बल्कि लोगों को कचरे से कमाई का जरिया भी मिल सकेगा। अंबाला पॉलिटेक्निक के इन छात्रों की यह उपलब्धि आज सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि सरकार या कोई बड़ी निजी कंपनी इस 'देसी तकनीक' को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए आगे आती है या नहीं।


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