अदालत ने ‘घृणास्पद भाषण’ को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर असम के मुख्यमंत्री को नोटिस जारी किया
Feb 26, 2026 9:52 PM
गुवाहाटी: गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को कई जनहित याचिकाओं के संबंध में नोटिस जारी किया, जिनमें उन पर ‘‘घृणास्पद भाषण’’ देने का आरोप लगाया गया है। इस मामले से संबंधित तीन अलग-अलग याचिकाओं के संबंध में राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भी नोटिस जारी किये गये। मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने तीनों याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 21 अप्रैल तय की है।
याचिकाकर्ताओं में से एक के अधिवक्ता शांतनु बोरठाकुर ने बताया कि प्रतिवादियों को अगली तारीख से पहले नोटिस का जवाब देना होगा। न्यायालय ने कोई अन्य आदेश जारी नहीं किया है। असमिया साहित्यकार हिरेन गोहेन, पूर्व डीजीपी हरेकृष्ण डेका और वरिष्ठ पत्रकार परेश मलाकर ने 24 फरवरी को एक याचिका दायर की थी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी 21 फरवरी को अलग-अलग याचिकाएं दायर कर मुख्यमंत्री को इस तरह की टिप्पणियां करने से रोकने का अनुरोध किया था। उच्चतम न्यायालय ने 16 फरवरी को शर्मा के खिलाफ कार्रवाई संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शर्मा द्वारा की गई टिप्पणियां समाज को विभाजित कर सकती हैं।
जनहित याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया है कि शर्मा ऐसे भाषण दे रहे हैं और वीडियो जारी कर रहे हैं जो अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा को खुले तौर पर भड़का रहे हैं और नागरिकों को कानून-व्यवस्था अपने हाथ में लेने के लिए उकसा रहे हैं।
इसमें आरोप लगाया गया है कि शर्मा ने असम में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ ‘‘खुलेआम नफरत फैलाने वाले भाषण’’ दिए हैं, जिसमें उनके सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार का आह्वान करना और उनके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना शामिल है।
इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री समुदाय के पहनावे और भाषा का हवाला देकर हिंसा और नफरत भड़का रहे हैं, सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा कर रहे हैं और अपने अधिकारियों को अल्पसंख्यक समुदाय को परेशान करने के लिए अपने सार्वजनिक पद का गलत इस्तेमाल करने का निर्देश दे रहे हैं। जनहित याचिका में मुख्यमंत्री के खिलाफ उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच और उचित कार्रवाई का भी अनुरोध किया गया है।