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लाडवा के कोणार्क अकादमी में जुटे शिक्षक, सीखा बच्चों के मानसिक तनाव को दूर करने का मंत्र

May 30, 2026 5:37 PM

लाडवा,(विजय कौशिक): बदलते दौर में स्कूली बच्चों पर बढ़ते पढ़ाई के बोझ और मानसिक तनाव को देखते हुए अब शिक्षण पद्धतियों में भी बड़े बदलाव की जरूरत महसूस की जाने लगी है। इसी कड़ी में लाडवा की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था 'द कोणार्क अकादमी' में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के सौजन्य से “विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण” विषय पर एक विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम (कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम) का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को इस काबिल बनाना है कि वे कक्षाओं में छात्रों की केवल शैक्षणिक जरूरतों को ही न देखें, बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को भी संवेदनशीलता से समझ सकें।

परीक्षा का खौफ और भावनात्मक चुनौतियां; विशेषज्ञों ने सुझाए कारगर उपाय

इस महत्वपूर्ण सत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सीबीएसई पंचकूला क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से विशेष तौर पर नियुक्त वरिष्ठ प्रशिक्षक सीमा गुप्ता और प्रमिला सिंगल लाडवा पहुंची थीं। प्रशिक्षण के दौरान दोनों विशेषज्ञों ने आज के दौर में विद्यार्थियों के भीतर पनप रहे मानसिक तनाव, बोर्ड और घरेलू परीक्षाओं के अनजाने दबाव तथा किशोरावस्था की भावनात्मक चुनौतियों पर बहुत ही विस्तार से चर्चा की।

शिक्षकों को व्यावहारिक टिप्स देते हुए प्रशिक्षकों ने कहा कि हर बच्चा खास होता है और उसकी मनोवैज्ञानिक जरूरतें भी अलग होती हैं। शिक्षकों को केवल एक 'लेक्चरर' की भूमिका से बाहर निकलकर बच्चों के साथ एक ऐसा सकारात्मक और दोस्ताना संवाद स्थापित करना चाहिए, जिससे छात्र बिना किसी झिझक या डर के अपने मन की बात साझा कर सकें। ऐसा करके ही बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाया जा सकता है और उनके मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा सकता है।

स्वस्थ मन ही सशक्त राष्ट्र की नींव: प्रधानाचार्या अंजनी सिंह

कार्यशाला के दौरान अपने विचार साझा करते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्या अंजनी सिंह ने एक बेहद मार्मिक बात कही। उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक शिक्षा का पैमाना केवल रिपोर्ट कार्ड पर छपे ऊंचे अंक या शैक्षणिक उपलब्धियां नहीं होना चाहिए। असली शिक्षा वह है जो छात्र के व्यक्तित्व को निखारे, उसमें अच्छे संस्कारों और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करे और उसके मानसिक स्वास्थ्य का समग्र विकास करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब हमारे बच्चों का मन स्वस्थ और तनावमुक्त रहेगा, तभी एक स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव रखी जा सकेगी।

एक्टिविटी और समूह चर्चा से सीखा बच्चों को संभालने का हुनर

इस कार्यशाला को पारंपरिक उबाऊ भाषणों से दूर रखने के लिए इसमें कई तरह की रोचक समूह चर्चाएं (ग्रुप डिस्कशन), केस स्टडीज और सहभागितापूर्ण गतिविधियां शामिल की गई थीं। इन एक्टिविटीज के जरिए शिक्षकों ने वास्तविक जीवन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने के गुर सीखे।

ट्रेनिंग के आखिरी सत्र में शामिल सभी प्रतिभागी शिक्षकों ने इस कार्यक्रम को बेहद उपयोगी, ज्ञानवर्धक और मौजूदा समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। कार्यक्रम के समापन पर स्कूल प्रबंधन द्वारा दोनों मुख्य प्रशिक्षकों और बाहर से आए शिक्षकों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। वहीं, उपस्थित शिक्षकों ने भी हाथ उठाकर यह संकल्प लिया कि वे स्कूलों में बच्चों के लिए एक ऐसा सुरक्षित, सकारात्मक और प्रेरणादायी माहौल तैयार करेंगे जहां पढ़ाई बोझ न लगे, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास का जरिया बने।

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