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बरनाला के फरवाही गांव में हादसे में मजदूर वरिंदर सिंह बॉबी की मौत, परिवार ने लगाए ठेकेदार पर गंभीर आरोप

Mar 30, 2026 2:43 PM

बरनाला: बरनाला जिले के गाँव फरवाही में जैक से मकान ऊँचा उठाने के दौरान हुए भयानक हादसे ने जहाँ तीन घरों के चिराग बुझा दिए हैं, वहीं मृतक मजदूर वरिंदर सिंह बॉबी के परिवार की दास्तां सुनकर हर आँख नम है। घटनास्थल पर पहुँची बॉबी की बुजुर्ग माता चरणजीत कौर का विलाप पत्थरों को भी पिघला रहा था। बॉबी अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, जिसकी मौत से एक पूरा परिवार सड़क पर आ गया है। 

मोगा जिले के गाँव दुसांझ (तलवंडी) की रहने वाली बेबस माँ चरणजीत कौर ने बताया कि उसकी जिंदगी दुखों की एक लंबी कहानी बनकर रह गई है। इस हादसे से पहले उसके पति की मौत हो चुकी थी और कुछ समय पहले उसका 16 वर्षीय छोटा बेटा भी संसार से रुखसत हो गया था। वरिंदर सिंह बॉबी ही उसका आखिरी सहारा था, जो अब मलबे के नीचे दबकर अपनी जान गँवा बैठा है। बॉबी अपने पीछे बूढ़ी माँ के अलावा पत्नी, दो मासूम बेटे और एक छोटी बेटी छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया सदा के लिए उठ गया है।

ठेकेदार पर लगे संगीन आरोप: नशे की लोरी देकर करवाया जाता था काम

मृतक की माता ने मकान उठाने वाले ठेकेदार रंजीत सिंह पर बहुत ही गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ठेकेदार गरीब नौजवानों की मजबूरी का फायदा उठाता था। उन्होंने दावा किया कि रंजीत सिंह नौजवानों को 'चिट्टे' (नशीला पाउडर) और नशीली गोलियों के नशे पर लगाकर उनसे खतरनाक काम लेता था। चरणजीत कौर के अनुसार, उनके बेटे को भी इसी नर्क में धकेला गया था ताकि वह बिना डर और थकान के जोखिम भरा काम कर सके।

इंसानियत से महरूम रहा ठेकेदार का रवैया

परिवार ने बताया कि इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद ठेकेदार रंजीत सिंह ने उन्हें सूचित करने तक की जहमत नहीं उठाई। उन्हें इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में गाँव फरवाही के लोगों के जरिए पता चला। परिवार का आरोप है कि हादसे के बाद ठेकेदार मौके से गायब हो गया और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार

बॉबी की मौत के बाद परिवार में कोई भी कमाने वाला सदस्य नहीं बचा है। छोटे-छोटे बच्चों के भविष्य और घर के गुजारे को लेकर बुजुर्ग माँ चिंता में डूबी हुई है। पीड़ित परिवार ने पंजाब सरकार और बरनाला प्रशासन से मांग की है कि दोषी ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और अनाथ हुए बच्चों के पालन-पोषण के लिए तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए।

जिंदगी की चुनौतियों से बेखबर मासूम: पिता के इंतजार में ताक रहे हैं दरवाजा

वरिंदर बॉबी की मौत ने न केवल एक माँ का बेटा छीना है, बल्कि उसके तीन मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया भी सदा के लिए उठा दिया है। दो छोटे बेटे और एक नन्ही बेटी, जो अभी जिंदगी की चुनौतियों से बेखबर हैं, अब अपने पिता के इंतजार में दरवाजे की ओर ताक रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि बॉबी बहुत मेहनती नौजवान था, जो दिन-रात अपने परिवार के सुनहरे भविष्य के लिए खतरनाक हालातों में काम करता था। पर किसे पता था कि जिस छत को वह जैक से सीधा करने गया था, वही उसकी कब्र बन जाएगी।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी ने ली जान

यह हादसा कहीं न कहीं निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली बड़ी लापरवाही और सुरक्षा प्रबंधों की कमी को भी उजागर करता है। पीड़ित परिवार के आरोपों के अनुसार, अगर ठेकेदार ने मजदूरों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए होते या रात के समय उन्हें खतरे वाली जगह पर सोने से रोका होता, तो आज ये तीन जानें बच सकती थीं। अब लोगों की माँग है कि ऐसे जोखिम भरे काम करवाने वाले ठेकेदारों के पंजीकरण और काम करने के तरीकों की गहराई से जांच की जाए ताकि भविष्य में कोई और 'बॉबी' इस तरह मौत के मुँह में न जाए।

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