प्रशासनिक नाक के नीचे लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़, बरनाला में ठेकों पर सरेआम बिक रही एक्सपायरी बीयर
Mar 03, 2026 11:37 AM
बरनाला: बरनाला जिले के भीतर शराब के ठेकों पर चंद पैसों के लालच में मानवीय जिंदगियों के साथ खेलने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। बरनाला शहर और हंडियाया क्षेत्र में स्थित शराब के ठेकों पर निर्धारित समय सीमा बीत चुकी बीयर सरेआम बेची जा रही है। इस बड़े घोटाले का खुलासा दो जागरूक युवाओं ने किया है। युवा सतपाल सिंह और गुरसेवक सिंह ने बताया कि उन्होंने बरनाला और हंडियाया के विभिन्न ठेकों से बीयर खरीदी थी, जिसकी अवधि काफी समय पहले समाप्त हो चुकी थी।
युवाओं ने न केवल आरोप लगाए हैं, बल्कि ऑनलाइन पेमेंट के सबूत और एक्सपायरी बोतलों के वीडियो भी सार्वजनिक किए हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग ठेकों पर इन बोतलों के दाम भी मनमर्जी से वसूले जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर सरकारी नियमों का उल्लंघन है। हैरानी की बात यह है कि जब इस संबंध में ठेके के करिंदों (कर्मचारियों) से बात की गई, तो उन्होंने बीयर की बोतल बदलने की बात कही।
लेकिन जैसे ही मीडिया टीम मौके पर पहुंची, तो करिंदे ने फ्रिज से एक्सपायरी स्टॉक बाहर निकालकर छिपा दिया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि एक्सपायरी बीयर का सेवन शरीर में धीमे जहर का काम करता है। निर्धारित समय बीतने के बाद बीयर में मौजूद केमिकल खराब हो जाते हैं, जिससे लिवर फेल होने, फूड पॉइजनिंग और पेट की भयानक बीमारियां हो सकती हैं। भाकियू कादियां के जिला नेता गुरविंदर सिंह नामधारी ने भी सख्त शब्दों में कहा कि मुनाफाखोरी के लिए लोगों को मौत के मुंह में धकेलना एक गंभीर मुद्दा है।
अधिकारियों ने साधी चुप्पी, उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में संबंधित विभागों की भूमिका भी शक के घेरे में है। जब इस गंभीर मुद्दे पर एक्साइज इंस्पेक्टर रजनीश कुमार और फूड सेफ्टी कमिश्नर अदिति गुप्ता से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों की यह चुप्पी कई तरह के सवाल खड़े कर रही है कि क्या यह सब कुछ प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है?
लाइसेंस रद्द करने और ब्लैकलिस्ट की मांग
भाकियू कादियां के जिला नेता गुरविंदर सिंह नामधारी और भाकियू डकौंदा के ब्लॉक अध्यक्ष जगसीर सिंह सीरा ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि सिर्फ बोतलें जब्त करने से कार्रवाई पूरी नहीं होती। उन्होंने मांग की कि ऐसे ठेकेदारों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं और उन्हें हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी दल के नेताओं से इसका जवाब मांगा जाएगा।
सैंपलिंग और चेकिंग प्रक्रिया पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग और एक्साइज विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि ये विभाग समय-समय पर चेकिंग और सैंपलिंग करते हैं, तो फिर एक्सपायरी तारीख वाली बीयर ठेकों पर सरेआम कैसे बिक रही है? क्या यह सैंपलिंग और चेकिंग सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित है या फिर विभागीय अधिकारियों द्वारा फील्ड में जाकर कोई चेकिंग की ही नहीं जा रही? लोगों का मानना है कि यदि नियमों के अनुसार सख्ती से सैंपल भरे जाते और स्टॉक की जांच होती, तो आज लोगों की सेहत के साथ ऐसा खिलवाड़ न होता। यह लापरवाही सीधे तौर पर विभागीय अनदेखी और ठेकेदारों के साथ कथित मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।