Bhiwani Boxers CWG Final: भिवानी के 5 बॉक्सर फाइनल में, भारत के लिए पक्के किए मेडल
भिवानी के 5 बॉक्सर फाइनल में, भारत के लिए पक्के किए मेडल
Bhiwani Boxers CWG Final: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ‘मिनी क्यूबा’ के नाम से मशहूर हरियाणा के भिवानी का डंका एक बार फिर बज उठा है। भारतीय मुक्केबाजी दल का प्रतिनिधित्व कर रहे भिवानी के 5 धाकड़ मुक्केबाजों ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल बाउट में जगह बना ली है।
रिंग में अपने मुक्कों का लोहा मनवाने वाले इन पांचों खिलाड़ियों—जैस्मिन लंबोरिया, प्रिया घनघस, प्रीति पंवार, साक्षी चौधरी और सचिन सिवाच—ने कम से कम सिल्वर मेडल तो पक्का कर लिया है। अब पूरा देश उम्मीद लगाए बैठा है कि ये मुक्केबाज देश के लिए स्वर्ण पदक लेकर ही लौटेंगे।
सचिन सिवाच ने 5-0 से दी करारी शिकस्त
60 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे भिवानी के मित्ताथल गांव निवासी सचिन सिवाच ने सेमीफाइनल में जबरदस्त मुक्केबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने विरोधी ओविन हैरिश को एकतरफा अंदाज में 5-0 से मात देकर फाइनल की राह साफ की।
विश्व कप 2025 में गोल्ड और एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीत चुके सचिन अब कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल अपनी झोली में डालने से महज एक कदम दूर हैं।
प्रिया घनघस और साक्षी चौधरी की पंच-पावर
धनाना गांव की बेटी प्रिया घनघस ने 60 किलोग्राम भारवर्ग में इंग्लैंड की मजबूत दावेदार लक्की किंग्स को 5-0 से पटखनी दी। कभी कुश्ती का शौक रखने वाली प्रिया को भिवानी में एकेडमी न मिलने पर मुक्केबाजी अपनानी पड़ी थी और आज वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की शान बनी हुई हैं।
इसी गांव की साक्षी चौधरी ने 51 किलोग्राम भारवर्ग में कनाडा की अमबेर जाने वाल को 5-0 से शिकस्त देकर फाइनल का टिकट कटाया। पढ़ाई के साथ मुक्केबाजी का संतुलन साधने वाली साक्षी फिलहाल एमबीए कर रही हैं और उनकी इस उपलब्धि से पूरा परिवार और गांव गदगद है।
जैस्मिन की तूफानी जीत, प्रीति पंवार ने भी दिखाई ताकत
57 किलोग्राम भारवर्ग में उतरीं स्टार बॉक्सर जैस्मिन लंबोरिया ने सेमीफाइनल में आक्रामक शुरुआत की। उन्होंने दूसरे ही राउंड में अपनी प्रतिद्वंद्वी मसेलेला के खिलाफ ‘रेफरी स्टॉप्स कॉन्टेस्ट’ (RSC) के जरिए मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारतीय सेना में सेवारत जैस्मिन इससे पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में भी देश को गोल्ड दिला चुकी हैं।
वहीं 54 किलोग्राम वर्ग में बड़सरा गांव की बेटी प्रीति पंवार ने कैथेरिने मवापे को परास्त कर फाइनल में प्रवेश किया। एशियाई खेलों की पदक विजेता प्रीति ने अपने चाचा और कोच विनोद कुमार की देखरेख में बॉक्सिंग की बारीकियां सीखी हैं। अब सभी की निगाहें इन पांचों सूरमाओं के फाइनल मुकाबलों पर टिकी हुई हैं।
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