E85 Fuel Launch soon: महंगे पेट्रोल से मिलेगी मुक्ति! सरकार लॉन्च कर रही है ₹20 सस्ता E85 ईंधन
Jun 06, 2026 5:08 PM
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया के युद्ध ने दुनिया भर के तेल बाजारों में आग लगा रखी है। भारत भी इससे अछूता नहीं है, जहां अकेले मई के महीने में ही तीन बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ीं। तेल की इस तपिश के बीच अब राहत की एक बड़ी उम्मीद हरी ईंधन यानी इथेनॉल से आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि सरकार जल्द ही देश में 'E85' ईंधन की कमर्शियल बिक्री शुरू करने जा रही है। यह कदम न सिर्फ महंगे पेट्रोल से जूझ रहे मध्यम वर्ग की जेब का बोझ हल्का करेगा, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर देगा।
समझिए क्या है E85 का गणित और क्यों कम होगी इसकी कीमत
E85 कोई साधारण ईंधन नहीं है, बल्कि यह 85 फीसदी इथेनॉल और महज 15 फीसदी पेट्रोल का एक खास मिश्रण है, जिसे मुख्य रूप से फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों के लिए तैयार किया गया है। सरकार ने नीतिगत स्तर पर इसकी कीमत को सामान्य E20 पेट्रोल से सीधे 20 रुपये प्रति लीटर कम रखने का मन बनाया है। इस भारी कटौती के पीछे एक ठोस तकनीकी कारण भी है—दरअसल, इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (Energy Density) शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले लगभग एक-तिहाई कम होती है, जिसके कारण गाड़ी का माइलेज थोड़ा घट जाता है। ग्राहकों को माइलेज में होने वाले इसी नुकसान की भरपाई कीमत कम करके दी जा रही है।
चार शहरों से होगी शुरुआत, 120 अरब डॉलर के आयात बिल पर लगेगी लगाम
हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 50 से 100 फ्यूल स्टेशन खोले जाएंगे। इसके बाद साल 2026 के अंत तक इस नेटवर्क को 500 स्टेशनों तक फैलाया जाएगा, जबकि 2027 तक पूरे देश में 5,000 E85 स्टेशन खोलने का ब्लूप्रिंट तैयार है। केंद्रीय मंत्री ने देश की दुखती रग पर हाथ रखते हुए कहा कि वर्तमान में भारत का जीवाश्म ईंधन आयात बिल लगभग 120 अरब डॉलर (करीब 10 लाख करोड़ रुपये) वार्षिक है। अगर देश के वाहन E85 और E100 (100% इथेनॉल) पर शिफ्ट होते हैं, तो विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी।
400 स्टेशनों पर पहले से मिल रहा है E100, अन्नदाता बनेंगे 'ऊर्जादाता'
आपको बता दें कि देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल (IOC) पहले से ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में करीब 400 'E100' ईंधन स्टेशनों का सफल संचालन कर रही है। सरकार का अनुमान है कि यदि देश में बनने वाले कुल दोपहिया और चारपहिया वाहनों में से आधे भी फ्लेक्स-फ्यूल इंजन तकनीक से लैस हो जाएं, तो बाजार में 311.8 करोड़ लीटर अतिरिक्त इथेनॉल की मांग पैदा होगी। यह अतिरिक्त मांग सीधे तौर पर हमारे देश के किसानों की झोली में जाएगी, जिन्हें गन्ने और अनाज से इथेनॉल बनाने के बदले लगभग 12,403 करोड़ रुपये का सीधा भुगतान मिलेगा। भारत ने 2014 में महज 1.5 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग से सफर शुरू किया था, जो आज 20 फीसदी के पड़ाव को पार कर चुका है।