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दो से तीन फाड़ हुई लाडवा अनाज मंडी, आढ़तियों की कलह में उभरा 'तीसरा मोर्चा'

Jun 06, 2026 5:01 PM

लाडवा (कैलाश गोयल) हरियाणा की सबसे आधुनिक और बड़ी अनाज मंडियों में शुमार लाडवा मंडी इन दिनों फसलों की आवक के लिए नहीं, बल्कि आढ़तियों की आपसी खींचतान और बगावत के लिए चर्चा में है। शनिवार 6 जून को मंडी की राजनीति में उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया, जब दो हिस्सों में बंटी आढ़ती एसोसिएशन में एक तीसरा कोण उभर आया। विस्तार अनाज मंडी के व्यापारियों ने मौजूदा दोनों गुटों से किनारा करते हुए 'विस्तार अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन' के नाम से अपनी नई बिरादरी खड़ी कर ली है। मंडी धर्मशाला में हुई एक अहम बैठक के दौरान सर्वसम्मति से स्वीटी भुल्लर को इस नए मोर्चे का प्रधान घोषित कर दिया गया।

एकाधिकार की जंग और वादों से पलटने की कहानी

इस पूरे विवाद की जड़ें पिछले साल के घटनाक्रम से जुड़ी हैं। दरअसल, पिछले साल तक लाडवा मंडी चार अलग-अलग गुटों में बिखरी हुई थी। उस वक्त स्वीटी भुल्लर और उनके सहयोगियों ने कड़ी मशक्कत कर सभी को एक जाजम पर बैठाया था और सर्वसम्मति से राजीव आर्य को एक साल के लिए पूरी मंडी का प्रधान चुना था।

तय फॉर्मूले के मुताबिक, एक साल बाद नए सिरे से चुनाव होने थे। लेकिन आरोप है कि कार्यकाल खत्म होने से एक महीने पहले ही मंडी में अंदरूनी बगावत हो गई। नाराज आढ़तियों के एक गुट ने आनन-फानन में संजय गर्ग को अपना प्रधान चुन लिया। इसके जवाब में पहले धड़े ने पलटवार करते हुए राजीव आर्य को दोबारा अगले दो साल के लिए प्रधान घोषित कर दिया। इसी शह और मात के खेल के बीच लाडवा मंडी दो धड़ों में पूरी तरह विभाजित हो गई थी।

बीच का रास्ता: भाईचारे की दुहाई और नई टीम का ऐलान

दो समानांतर एसोसिएशन बनने का सबसे बड़ा नुकसान विस्तार अनाज मंडी के आढ़तियों को उठाना पड़ रहा था। कुछ व्यापारी संजय गर्ग के पाले में खड़े थे, तो कुछ राजीव आर्य के साथ। इस खींचतान की वजह से रोजमर्रा के व्यापारिक संबंधों और आपसी भाईचारे में कड़वाहट घुलने लगी थी।

इसी कड़वाहट को दूर करने के लिए आढ़ती और समाजसेवी प्रदीप पंजेटा की सदारत में एक विशेष पंचायत बुलाई गई। बैठक में मौजूद व्यापारियों ने दो टूक कहा कि वे किसी की व्यक्तिगत लड़ाई का हिस्सा नहीं बनेंगे और अपनी अलग पहचान रखेंगे। इसके बाद नई कार्यकारिणी का बिगुल फूंका गया, जिसमें श्यामसुंदर सैनी को सेक्रेटरी और साहब सिंह कंबोज को तिजोरी की कमान (कोषाध्यक्ष) सौंपी गई। बाकी बचे पदों और कार्यकारिणी के विस्तार का जिम्मा नए प्रधान पर छोड़ा गया है।

"व्यापारियों का नुकसान नहीं होने दूंगा"

ताजपोशी के तुरंत बाद पत्रकार वार्ता में नवनियुक्त प्रधान स्वीटी भुल्लर का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। उन्होंने किसी भी गुट पर सीधा हमला करने के बजाय बेहद परिपक्वता से कहा, "मैं कभी भी मंडी को बांटने या अलग एसोसिएशन बनाने के पक्ष में नहीं रहा। आज भी मेरी पहली प्राथमिकता मंडी की एकता है। यदि पुराने दोनों गुट अपने अहंकार को छोड़कर व्यापारियों के हित में एक मंच पर आते हैं, तो मैं अपनी पूरी टीम के साथ इस पद को छोड़ने और उनके साथ विलय करने के लिए 24 घंटे तैयार हूं।"

इस सियासी उठापटक और सांगठनिक फेरबदल के दौरान लाडवा मंडी के कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे, जिनमें अशोक शर्मा, रमन ढिल्लों, जगदीश, सुभाष कंबोज, रामपाल, राहुल सैनी, रामकुमार, बबला बपदी, देवी दयाल शर्मा, जय राम सैनी, रिंकेश गर्ग, प्रेम कंबोज, नरेंद्र कश्यप, रणजीत सिंह, कमलजीत सैनी, अंग्रेज सिंह, सुरेश, साहिल अग्रवाल, जयप्रकाश गर्ग, करणदीप चौहान, राहुल बड़शामी, रंजीत सैनी, चन्दगी राम, हरकेश सिंह, अमित और रिशीपाल शामिल थे। अब देखना यह होगा कि भुल्लर के इस 'एकता दांव' के बाद पुराने दोनों गुट क्या रुख अख्तियार करते हैं।

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