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कच्चे तेल में तेजी से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 2,494 अंक लुढ़का

Mar 09, 2026 1:41 PM

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। इस वैश्विक असर ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया और कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स तथा एनएसई निफ्टी दोनों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स एक समय 2,494.35 अंक यानी 3.16 प्रतिशत गिरकर 76,424.55 अंक पर पहुंच गया। इसी दौरान एनएसई का निफ्टी सूचकांक 752.65 अंक यानी 3.07 प्रतिशत टूटकर 23,697.80 अंक के स्तर तक आ गया।


कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 17.06 प्रतिशत उछलकर 108.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। तेल की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी से ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए लागत का दबाव बढ़ने की आशंका बनती है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए तेल की कीमतों में हर बड़ी वृद्धि का सीधा असर वित्तीय बाजार और निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।


सेंसेक्स की सभी कंपनियों में गिरावट

सोमवार के कारोबार में गिरावट इतनी व्यापक रही कि सेंसेक्स में शामिल सभी 30 कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। बैंकिंग, ऑटो और सीमेंट क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों में दबाव रहा। भारतीय स्टेट बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, इंटरग्लोब एविएशन और अदाणी पोर्ट्स जैसे प्रमुख शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए कई सेक्टरों में बिकवाली की, जिससे सूचकांकों पर दबाव और बढ़ गया।


विशेषज्ञों ने जताई चिंता

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि ब्रेंट क्रूड के 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने से वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और शेयर बाजारों को बड़ा झटका लग सकता है। उनके अनुसार यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऊर्जा लागत बढ़ने से महंगाई और व्यापार संतुलन दोनों पर दबाव बन सकता है।


एशियाई बाजारों में भी कमजोरी

भारतीय बाजार की गिरावट के साथ एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक छह प्रतिशत से अधिक टूट गया जबकि जापान का निक्की लगभग पांच प्रतिशत गिर गया। चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी नुकसान में कारोबार करते रहे। इससे साफ संकेत मिला कि तेल कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव का असर पूरे एशियाई बाजारों पर पड़ा है।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 6,030.38 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 6,971.51 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर कुछ संतुलन बनाने की कोशिश की। इससे पहले शुक्रवार को भी बाजार में गिरावट देखी गई थी जब सेंसेक्स 1,097 अंक गिरकर 78,918.90 पर बंद हुआ था। उसी दिन निफ्टी 315.45 अंक की गिरावट के साथ 24,450.45 के स्तर पर बंद हुआ था।

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