Breaking News
Karnal Congress Protest Nilokheri: नीलोखेड़ी में कांग्रेस का प्रदर्शन, पुतला फूंकते वक्त जलते पुतले की चपेट में आने से बाल-बाल बचे प्रदेश अध्यक्षDussehra: जानिए दशहरे पर किन संकेतों से पूरी होती है हर मनोकामना, इन शुभ चीजों के दर्शन बिल्कुल न चूकेंTiger Shroff Update: टाइगर श्रॉफ अपडेट, गैंगस्टर अनिल पंडित का परिवार करनाल में पिता पुजारी, नाबालिग आरोपी की खुली कुंडलीShooter Neeru Dhanda: हरियाणा खेल विभाग की पुरस्कार सूची में शूटर नीरू ढांडा का नाम शामिल, मिलेंगे इतने करोड़Saha Police Controversy: साहा-शहजादपुर रोड पर ओवरलोड वाहनों पर पुलिस की ‘मेहरबानी’, ग्रामीणों में भारी रोषKarnal Congress Protest Nilokheri: नीलोखेड़ी में कांग्रेस का प्रदर्शन, पुतला फूंकते वक्त जलते पुतले की चपेट में आने से बाल-बाल बचे प्रदेश अध्यक्षDussehra: जानिए दशहरे पर किन संकेतों से पूरी होती है हर मनोकामना, इन शुभ चीजों के दर्शन बिल्कुल न चूकेंTiger Shroff Update: टाइगर श्रॉफ अपडेट, गैंगस्टर अनिल पंडित का परिवार करनाल में पिता पुजारी, नाबालिग आरोपी की खुली कुंडलीShooter Neeru Dhanda: हरियाणा खेल विभाग की पुरस्कार सूची में शूटर नीरू ढांडा का नाम शामिल, मिलेंगे इतने करोड़Saha Police Controversy: साहा-शहजादपुर रोड पर ओवरलोड वाहनों पर पुलिस की ‘मेहरबानी’, ग्रामीणों में भारी रोष

Chandigarh News: जीएमसीएच-32 में इलाज की रफ्तार पर ब्रेक, यूरोलॉजिस्ट नहीं, सर्जरी भी रह गई आधी

Chandigarh News: जीएमसीएच-32 में इलाज की रफ्तार पर ब्रेक, यूरोलॉजिस्ट नहीं, सर्जरी भी रह गई आधी

जीएमसीएच-32 में इलाज की रफ्तार पर ब्रेक

AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION
VVinita Kohliस्रोत: जगमार्ग रिपोर्टर- मयंक मिश्रा

Chandigarh News: सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में फिलहाल एक भी यूरोलॉजिस्ट नहीं है। विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर तैनात एकमात्र विशेषज्ञ के इस्तीफा देने के बाद पिछले कुछ दिनों से ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ रहा है। खासकर नियमित फॉलोअप वाले मरीजों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। ऐसे में मरीजों को पीजीआई या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। सरकारी अस्पताल में कम खर्च में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों के सामने अब निजी अस्पताल में महंगा इलाज कराने की मजबूरी है। वहीं, जीएमसीएच-32 के प्रशासनिक अधिकारियों के मुकाबिक अस्पताल प्रशासन जल्द से जल्द कॉन्ट्रैक्ट आधार पर नए यूरोलॉजिस्ट की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास कर रहा है, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।

यूरोलॉजी विभाग में किडनी स्टोन, प्रोस्टेट, पेशाब संबंधी समस्याओं और अन्य बीमारियों के मरीज बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इनमें कई ऐसे मरीज होते हैं, जिनका इलाज पहले से चल रहा होता है और उन्हें डॉक्टर ने फॉलोअप के लिए बुलाया होता है। विशेषज्ञ उपलब्ध न होने से ऐसे मरीजों को इलाज आगे बढ़ाने में परेशानी हो रही है। जीएमसीएच-32 के यूरोलॉजी विभाग में विशेषज्ञों की कमी नई नहीं है। पिछले एक वर्ष में चार यूरोलॉजिस्ट अस्पताल छोड़ चुके हैं। इनमें दो विशेषज्ञ डेपुटेशन पर थे, जबकि दो कॉन्ट्रैक्ट आधार पर नियुक्त किए गए थे। अब कॉन्ट्रैक्ट पर तैनात आखिरी यूरोलॉजिस्ट के भी इस्तीफा देने के बाद विभाग में एक भी विशेषज्ञ नहीं बचा है। ऐसे में मरीजों को दूसरे सरकारी अस्पतालों या निजी अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

विज्ञापन

 

रेनोवेशन के चलते सर्जरी आधी, मरीजों को मिल रही नई तारीखें

जीएमसीएच-32 की दूसरी मंजिल स्थित सी-ब्लॉक के ऑपरेशन थिएटर में पिछले कुछ महीनों से चल रही रेनोवेशन के कारण अस्पताल में नियमित सर्जरी की संख्या करीब आधी रह गई है। 10 ऑपरेशन थिएटर बंद होने से जनरल सर्जरी, ईएनटी और ऑर्थोपेडिक्स विभाग के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले से ऑपरेशन की तारीख ले चुके मरीजों को अस्पताल की ओर से फोन कर नई तारीख दी जा रही है। फिलहाल एक ही स्लॉट में नियमित सर्जरी की जा रही है, जबकि इमरजेंसी ऑपरेशन पहले की तरह जारी हैं। जीएमसीएच के अधिकारियों के अनुसार रेनोवेशन का काम लगभग पूरा हो गया है और जल्द ही ओटी शुरू हो जाएगी।

 

एंडोस्कोपिक मशीन खराब, साइनस और स्कल-बेस सर्जरी ठप

जीएमसीएच-32 के ईएनटी विभाग में एंडोस्कोपिक साइनस और स्कल-बेस सर्जरी ठप हो गई हैं। फिलहाल विभाग में नाक और कान की सामान्य सर्जरी ही हो रही है। इसकी वजह विभाग में इस्तेमाल होने वाली एंडोस्कोपिक मशीन का खराब होना है। मशीन खराब होने का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। ईएनटी विभाग की खराब मशीन को बदलने के लिए खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन टेंडर प्रक्रिया बीच में अटकने के कारण नई मशीन की खरीद में देरी हो रही है। ऐसे में एंडोस्कोपिक सर्जरी के लिए इंतजार कर रहे मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है।

एंडोस्कोपिक साइनस और स्कल-बेस सर्जरी सामान्य ऑपरेशन से अलग और जटिल प्रक्रियाएं हैं। इन सर्जरी के लिए मरीजों को कई बार लंबे समय तक ऑपरेशन की तारीख का इंतजार करना पड़ता है। तारीख मिलने के बाद अस्पताल पहुंचकर भर्ती होने और फिर मशीन उपलब्ध न होने के कारण सर्जरी टलने से मरीजों को दोबारा नई तारीख का इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि ऑपरेशन के लिए पहले से तैयारी करनी पड़ती है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद सर्जरी न हो पाने पर न केवल उनका समय और पैसा बर्बाद होता है, बल्कि बीमारी के साथ दोबारा ऑपरेशन की तारीख का इंतजार करना भी मुश्किल हो जाता है।

ख़बर पसंद आई? शेयर करें
विज्ञापन

चंडीगढ़ की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।