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chandigrah News: मौत के बाद भी जिंदगी बांट गए 26 वर्षीय योगेश, अंगदान से तीन मरीजों को मिला नया जीवन

Jun 18, 2026 10:18 AM

चंडीगढ़: आंखों में बेटे को खोने का दर्द था, दिल में अपनों से बिछड़ने का गम था, लेकिन इसी कठिन घड़ी में एक परिवार ने ऐसा फैसला लिया जिसने कई जिंदगियों में उम्मीद की नई रोशनी जगा दी। मात्र 26 वर्षीय लेक्चरर योगेश कुमार की असमय मौत के बाद उनके परिवार ने अंगदान कर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के चिला कलां निवासी योगेश कुमार आर्यन्स ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, राजपुरा में लेक्चरर थे। उन्होंने एम. फार्मा की पढ़ाई पूरी की थी और अपने करियर को लेकर आगे बढ़ रहे थे। लेकिन 28 मई को एक सड़क हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं। सड़क पार करते समय एक वाहन की चपेट में आने से योगेश गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ लाया गया। डॉक्टरों की पूरी कोशिशों के बावजूद उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया गया। परिवार के लिए यह पल बेहद पीड़ादायक था, लेकिन योगेश के पिता पूरण चंद ने बेटे की यादों को दूसरों की जिंदगी में जिंदा रखने का फैसला लिया। उन्होंने बेटे के अंगदान की सहमति देकर तीन गंभीर मरीजों को जीवन का अनमोल तोहफा दे दिया। पीजीआई चंडीगढ़ में योगेश के लीवर, दोनों किडनी और पैंक्रियाज का सफल प्रत्यारोपण किया गया। एक मरीज को किडनी, दूसरे मरीज को किडनी-पैंक्रियाज और तीसरे मरीज को लीवर प्रत्यारोपित किया गया।

पीजीआई निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने योगेश के परिवार के इस साहसिक निर्णय को मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों के फैसले अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता और उम्मीद को मजबूत करते हैं। वहीं, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आशीष शर्मा ने बताया कि यह पीजीआई का 73वां सफल सिमल्टेनियस पैंक्रियाज-किडनी ट्रांसप्लांट है। योगेश कुमार अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों के जरिए तीन लोगों की धड़कनों में उनकी जिंदगी आगे बढ़ रही है। एक परिवार ने अपने सबसे बड़े दुख को मानव सेवा में बदलकर यह संदेश दिया कि इंसान की जिंदगी खत्म होने के बाद भी उसकी संवेदनाएं और अच्छाई दूसरों को नई जिंदगी दे सकती हैं।

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