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Bhiwani Patwari arrested: फसल मुआवजा पास करने के नाम पर 10 हजार की घूस लेते पटवारी गिरफ्तार

Jun 18, 2026 12:09 PM

भिवानी। हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को भिवानी जिले में एक और बड़ी कामयाबी मिली है। भिवानी के गुजरानी गांव में तैनात पटवारी हर्ष छाबड़ा को ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाकर 10 हजार रुपये की नकद रिश्वत लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया। सरकारी महकमे में बैठे इस घूसखोर कर्मचारी ने एक पीड़ित किसान की लाचारी का फायदा उठाते हुए उसकी फसल के मुआवजे की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर यह सौदा किया था।

15 हजार से शुरू हुआ था मोलभाव, किसान ने ऐसे फंसाया जाल

मामले के मुताबिक, गुजरानी गांव के रहने वाले किसान मंजीत अपनी बर्बाद हुई फसल के सरकारी मुआवजे के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। हलका पटवारी हर्ष छाबड़ा ने मंजीत का मुआवजा पास कराने के बदले 15 हजार रुपये की डिमांड सामने रख दी। किसान मंजीत इस बात से बेहद परेशान था, लेकिन उसने घूसखोर पटवारी को सबक सिखाने की ठान ली। मंजीत ने पटवारी से थोड़ा मोलभाव किया और आखिरकार बात 10 हजार रुपये पर पक्की हो गई। इसके तुरंत बाद किसान ने चुपके से पूरी बात की जानकारी एंटी करप्शन ब्यूरो को दे दी।

ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में बिछाया गया जाल

शिकायत मिलते ही एसीबी की टीम ने तुरंत एक्शन प्लान तैयार किया। नियमों के मुताबिक, रेड के लिए एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गई और नोटों पर विशेष केमिकल लगाकर शिकायतकर्ता किसान मंजीत को दे दिए गए। जैसे ही मंजीत तय रकम लेकर पटवारी हर्ष छाबड़ा के पास पहुंचा और उसने पैसे आरोपी के हाथ में थमाए, वैसे ही आसपास सादे कपड़ों में मुस्तैद एसीबी की टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। जब ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पटवारी के हाथ धुलवाए गए, तो केमिकल के कारण उनका रंग गुलाबी हो गया, जिससे घूसखोरी की पुष्टि मौके पर ही हो गई।

कानूनी शिकंजा कसा, आगे की जांच जारी

रिश्वत के पैसों के साथ रंगे हाथ धरे जाने के बाद आरोपी पटवारी के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। एसीबी की टीम उसे हिरासत में लेकर भिवानी दफ्तर पहुंची, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (Anti-Corruption Act) के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इस तरह के मामलों में विभाग के कुछ अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं।

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