Haryana News: हांसी के चानौत गांव में आधी रात को पुलिस और ग्रामीणों में हिंसक झड़प, चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात
Jun 18, 2026 11:20 AM
हांसी। हरियाणा के हिसार जिले के अंतर्गत आने वाले हांसी के चानौत (चैनत) गांव में पिछले 33 दिनों से सुलग रही पानी की चिंगारी अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। राजली-हांसी भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन से अपने गांव के लिए 'टी-कनेक्शन' की मांग पर अड़े ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बुधवार देर रात करीब दो बजे उस समय सीधी भिड़ंत हो गई, जब पुलिस अचानक डॉक्टरों की टीम और एंबुलेंस लेकर धरना स्थल पर धमक पड़ी। इस औचक कार्रवाई से चानौत गांव छावनी में तब्दील हो गया और देखते ही देखते पुलिसकर्मियों तथा ग्रामीणों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
ग्रामीणों का गंभीर आरोप: 'हमें घसीटा गया, बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ी'
घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। चानौत गांव के सरपंच प्रतिनिधि हिमांशु सहित आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि आधी रात को पुलिस ने अनशन पर बैठे लोगों पर बल प्रयोग किया। ग्रामीणों का कहना है, "हमें घसीट-घसीटकर मारा गया, पैरों पर लाठियां भांजी गईं और जबरन गाड़ियों में ठूंसने की कोशिश की गई।" इस अफरा-तफरी और हंगामे के बीच संघर्ष के दौरान मौके पर मौजूद डीएसपी की नेम प्लेट तक उखड़कर गिर गई, जिसे ग्रामीणों ने अपने कब्जे में ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के सदमे से गांव के एक बुजुर्ग दादा टेकराम की तबीयत भी बिगड़ गई है।
डीएसपी की सफाई: 'हम सिर्फ अनशनकारियों की जान बचाने गए थे'
दूसरी तरफ, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएसपी रविंद्र सांगवान ने पुलिस पर लगे बर्बरता के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिविल प्रशासन के अनुरोध पर पुलिस टीम केवल आमरण अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य की जांच करने गई थी, क्योंकि उनकी सेहत लगातार गिर रही है। डीएसपी के मुताबिक, जब टीम वहां पहुंची तो अनशनकारी मौके पर नहीं मिले। उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही और भीड़ अधिक होने के कारण ड्यूटी के दौरान उनकी नेम प्लेट गिर गई होगी, लेकिन किसी भी ग्रामीण पर कोई लाठी नहीं चलाई गई।
80 करोड़ की योजना और साख की लड़ाई
इस पूरे फसाद की जड़ करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही राजली-हांसी पेयजल पाइपलाइन परियोजना है। केंद्र सरकार की 'अमृत योजना' के तहत बरवाला के राजली भाखड़ा हेड से हांसी शहर तक करीब 30 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिसका उद्देश्य हांसी शहर की प्यास बुझाना है। इस समय पाइपलाइन का काम चानौत गांव तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों की दलील बेहद साफ है कि जब यह जीवनदायिनी पाइपलाइन उनके गांव की छाती चीरकर गुजर रही है, तो उन्हें इसमें से पानी क्यों नहीं दिया जा रहा? वहीं प्रशासन का अड़ियल रुख है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ शहरी क्षेत्र के लिए है, इसलिए तकनीकी रूप से गांव को कनेक्शन देना मुमकिन नहीं है।
बातचीत के चार दौर फेल, अब ट्रैक्टर मार्च से थमेगी रफ्तार?
इस गंभीर संकट को टालने के लिए अब तक सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच चार दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। बीते कल ही मंत्री रणबीर गंगवा के साथ हुई चौथे दौर की बैठक भी पूरी तरह बेनतीजा रही, क्योंकि सरकार ग्रामीणों को सीधी पाइपलाइन के बजाय किसी अन्य वैकल्पिक व्यवस्था का आश्वासन दे रही है जिसे आंदोलनकारी मानने को तैयार नहीं हैं। आधी रात के इस ड्रामे के बाद आंदोलनकारियों ने आज बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर मार्च निकालने का ऐलान किया है, जिससे हांसी और आसपास के इलाकों में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में माहौल खराब नहीं होने दिया जाएगा।